असली घर है रिक्त आकाश
घर की चिंता करते करते
समय और शक्तियाँ लगायी,
साथ नहीं जाने वाला है
धोखा देगा, पड़े सुनायी !
दीवारों से नहीं बना है
असली घर है रिक्त आकाश,
वातावरण विशुद्ध बना लें
अंतर से उमड़ पड़े प्रकाश !
वायु शुद्ध हो, प्राण शुद्ध हों
भाव विमल मुस्कान सजीली,
घर के भीतर रहने वाला
हर इक छेड़े तान सुरीली !
प्रेम बहे कोई द्वन्द्व न हो
जीवन इक वरदान बनेगा,
पलकों में शुभ स्वप्न सजेंगे
सम्मुख वही अनाम रहेगा !
बहुत सुंदर घर
जवाब देंहटाएंस्वागत व आभार!
हटाएंवाकई, घर मोहताज नहीं दीवारों के
जवाब देंहटाएं❤️
सही कहा है आपने, स्वागत व आभार!
हटाएंआपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में गुरुवार 28 मई, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुंदर
जवाब देंहटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएं