मुलाकात लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मुलाकात लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, फ़रवरी 3

प्रीत की बौछार

प्रीत की बौछार


आज हुई है जो बात फिर कभी वह बात न होगी
आज की रात जैसी हसीं कभी रात न होगी
आज चाँद ने खोल दिया है अन्तर अपना
चाँदनी की हो रही बरसात फिर ऐसी बरसात न होगी
आज हुई है किसी मीत से मुलाकात
शायद फिर ऐसी मुलाकात न होगी
आज बरसा है टूट कर मेघ शायद फिर न बरसे
आज पुकारा है किसी ने दूर से
फिर यह घटे न घटे
आज बजती हैं झाँझरें और खिलते हैं कमल

आज सजती हैं बहारें और उमड़े आते हैं बादल !

गुरुवार, मई 3

आया दांतों पसीना


आया दांतों पसीना


कल रात उन से मुलाकात हुई
कुछ बोध मिला कुछ बात हुई

अगर तन है मकान
तो रूप उसकी बैठक
सजा संवार रखते हैं बड़े जतन से जिसे
लगभग सभी इंसान..

आँखें झरोखे, दिल इबादतघर
अब सब घरों में तो होता नहीं
बड़ा.... सा.. पूजा घर
बहुत हुआ तो किसी आले में
या चलता है स्टोर घर...

फेफड़े, भीतरी खिड़कियाँ
धुएं से धुंधलाए जिनपर लगे शीशे
किसी किसी के.....  

पेट पाक शाला, जहाँ
बड़वाग्नि में पकता भोजन
वहाँ होती है
जिद्दी चिकनाई और ढेर सारा मसाला....

दर्द था दांत में सो हुआ यह मिलन   
न होता तो कहाँ उठती यह चिलमन
नजर भी नहीं आते दांत, जिनसे
जीवन भर सेवा हैं लेते
शुक्रिया एक दफा भी नहीं देते..

गर्म पेय या भोजन लिया मुख में
 सिहर जाता होगा इनेमल तब
इसकी परवाह करते हैं कब
झट से कोई कठोर वस्तु दबा ली
अनजाने उनकी जड़ हिला दी
मीठी चाय बहुत भाती  
पर शामत बेचारे दांतों की आती

ठंडा–गर्म लगने पर भी टाल ही जाते
अनसुनी कर देते हर गुहार
जब तक दर्द हद से न बढ़ जाये
और दम न तोड़ने लगे कोई दांत
दंत चिकित्सालय तक कदम नहीं बढ़ाये   
चिकित्सक झांकता जब भीतर
मुस्कुराते हुए सर उठाता है
उसे रोग के साथ
सुनहरा भविष्य जो नजर आता है...

दातों से यूँ हुईं कुछ बात
कट गयी सोते जागते रात...