सोमवार, अप्रैल 9

हम पहले ही मारे जा चुके हैं....



हम पहले ही मारे जा चुके हैं....

सारा कच्चा माल पड़ा है वहाँ
अस्तित्त्व के गर्भ में....
जो जैसा चाहे निर्माण करे निज जीवन का !

महाभारत का युद्ध पहले ही लड़ा जा चुका है
अब हमारी बारी है...
वहाँ सब कुछ है !
थमा दिये जाते हैं जैसे खिलाडियों को
उपकरण खेल से पूर्व
अब अच्छा या बुरा खेलना निर्भर है उन पर !

वहाँ शब्द हैं अनंत
जिनसे रची जा सकती हैं कवितायें
या लड़े जा सकते हैं युद्ध,

वहाँ बीज हैं
रुप ले सकते हैं जो मोहक फूलों का
 बदल सकते हैं मीठे फलों में
परिणित किया जा सकता है जिन्हें उपवन में
या यूँ ही छोड़ दिया जा सकता है
सड़ने को !

उस महासागर में मोती पड़े हैं
जिन्हें पिरोया जा सकता है
मुक्त माल में
अनजाने में की गयी हमारी कामनाओं की
पूर्ति भी होती है वहाँ से
हम ही चुन लेते हैं कंटक....
जानता ही नहीं जो, उसे जाना कहाँ है
अस्तित्त्व कैसे ले जायेगा उसे और कहाँ ?
जो जानता ही नहीं खेल के नियम
वह खेल में शामिल नहीं हो पायेगा
लीला चल रही है दिन-रात
उसके और उसके अपनों के मध्य
हम पहले ही मारे जा चुके हैं....

19 टिप्‍पणियां:

  1. दर्शन रूप विराट के, मिली दिव्यतम दृष्ट ।

    मरे हुए हम भी दिखे, सृजित करें नव सृष्ट ।।

    dineshkidillagi.blogspot.in

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  2. सारा कच्चा माल पड़ा है वहाँ
    अस्तित्त्व के गर्भ में....
    जो जैसा चाहे निर्माण करे निज जीवन का !

    बाँध दिया आपने कर्म से मन को ...
    दिव्य रचना ...अनीता जी ....अथाह सुकून देती हुई ...
    आभार ...!!

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  3. लीला उसकी अद्भुत...
    आपकी दृष्टि भी अद्भुत!
    सुन्दर रचना!

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  4. वाह!!!!!!!!!!!!!

    बुद्धि छोटी पड़ गयी, आपकी रचना में निहित भावों को वास्तविक रूप से समझने के लिए......

    सादर नमन आपको एवं आपकी लेखनी को.

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  5. vaah bahut sundar bhagvaan ne sab kuch diya hai nirbhar karta hai ki insaan uska saduoyog karta hai ya durupyog.umda bhaabhivyakti.

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  6. जीवन दर्शन को कहती सुंदर रचना .... सब कुछ है बस हमें अपने कर्म से साधना है सब

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  7. ये आदि है या अंत ... जीवित है या मृत्यु ... पहले जीवन है या मृत्यु ... गीता के कुछ रहस्य रहस्य ही हैं ... कृष्ण की माया ...

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  8. जानता ही नहीं जो, उसे जाना कहाँ है
    अस्तित्त्व कैसे ले जायेगा उसे और कहाँ ?

    ....गहन जीवन दर्शन को दर्शाती बहुत सुन्दर प्रस्तुति...आभार

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  9. पिछले कुछ दिनों से अधिक व्यस्त रहा इसलिए आपके ब्लॉग पर आने में देरी के लिए क्षमा चाहता हूँ...

    ....... रचना के लिए बधाई स्वीकारें....!!!

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  10. गहन दर्शन को दर्शाती बहुत सुन्दर प्रस्तुति.....

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  11. जो जानता ही नहीं खेल के नियम
    वह खेल में शामिल नहीं हो पायेगा
    लीला चल रही है दिन-रात
    उसके और उसके अपनों के मध्य
    हम पहले ही मारे जा चुके हैं....

    गहन जीवन दर्शन. यात्रोपरांत ब्लॉग पर स्वागत. इन सत्रह दिनों की अनुपस्थिति की पूर्ति शीघ्र कीजिये.

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  12. बहुत सुन्दर ..गहन जीवन दर्शन को दर्शाती हुई सार्थक प्रस्तुति..आभार...

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  13. उत्कृष्ट कृति |
    बुधवारीय चर्चा-
    मस्त प्रस्तुति ||

    charchamanch.blogspot.com

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  14. आप सभी सुधी पाठकों का बहुत बहुत आभार !

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