शनिवार, अप्रैल 7

यात्रा


पुनः नमस्कार ! आज ही मैं यात्रा से लौटी हूँ पूरे सत्रह दिन बाद घर आकर व आप सभी से मुखातिब होकर अच्छा लग रहा है. यात्रा में ही लिखी कुछ पंक्तियाँ प्रस्तुत हैं, धीरे-धीरे और भी बहुत कुछ जो कहने से रह गया है व डायरी के पन्नों में भरता गया है, लिखा जायेगा व आपकी पोस्ट भी एक-एक कर पढ़ने का अवसर मिलेगा.
यात्रा
हर यात्रा कड़ी होती है किसी पिछली यात्रा की
और जोड़ती है किसी नई यात्रा से....
हर यात्रा मन को कुछ नया सम्बल दे जाती है
कुछ नए तार जुड़ जाते हैं भीतर
नए हो जाते हैं रिश्ते
समय की गर्त जम गयी थी जिन पर , वे भाव
मिलन का जल पाकर खिल जाते हैं
हर यात्रा हमें आगे ले जाती है
उस महायात्रा पर जाने में बनती है सहायक...


10 टिप्‍पणियां:

  1. चलिए--
    स्वागत है |
    फिर से रम जाइए
    अपनी सुन्दर पोस्टों पर ||

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  2. चल चला चल..................

    सुंदर रचना..
    आपका स्वागत है......इन्तेज़ार रहेगा तरोताज़ा रचनाओं का...

    सादर
    अनु

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  3. बहुत सही लिखा आपने....सुन्दर रचना।

    हर यात्रा हमें आगे ले जाती है
    उस महायात्रा पर जाने में बनती है सहायक...

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  4. हर यात्रा हमें आगे ले जाती है
    बहुत सही कहा आपने..

    नीरज

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  5. हर यात्रा हमें आगे ले जाती है
    उस महायात्रा पर जाने में बनती है सहायक...

    ....बहुत सुन्दर और सटीक ...स्वागत है आपका ...आभार

    http://aadhyatmikyatra.blogspot.in/

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  6. यात्रा से यात्रा की जो कड़ियां मिलाई हैं और उस महा यात्रा तक की राह दिखाई हैं, वह वाकेई काबिले तारीफ़ है।

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  7. स्वागत है आपका .......बहुत खूबसूरत लगी पोस्ट....शानदार।

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