शनिवार, मई 25

मन राधा बस उसे पुकारे


मन राधा बस उसे पुकारे


झलक रही नन्हें पादप में
एक चेतना एक ललक,
कहता किस अनाम प्रीतम हित
खिल जाऊँ उडाऊं महक !

पंख तौलते पवन में पाखी
यूँ ही तो नहीं हैं गाते,
जाने किस छुपे साथी को
टी वी टुट् में वे पाते !

चमक रहा चिकना सा पत्थर
मंदिर में गया जो पूजा,
जाने कौन खींच कर लाया
भाव जगे न कोई दूजा !

चला जा रहा एक बटोही
थम कर किसकी ओर निहारे,
गोविन्द राह तके है भीतर
मन राधा बस उसे पुकारे !



11 टिप्‍पणियां:

  1. टी वी टुट्.....का दुबारा प्रयोग अच्छा लगा.........एक नै चेतना का उदय बहुत ही सुन्दर लगा।

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  2. अस्तित्व में ईश्वर की अनुभूति कराती रचना।

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  3. बहुत प्यारी रचना ..... शायद दो बार टाइप हो गयी है ।

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    1. संगीता जी, आभार त्रुटि की ओर ध्यान दिलाने के लिए..

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  4. झलक रही नन्हें पादप में
    एक चेतना एक ललक,
    कहता किस अनाम प्रीतम हित
    खिल जाऊँ उडाऊं महक !

    बहुत सुन्दर भाव अनीता जी .

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  5. अनुजी,अनुपमा जी, चतुर्वेदी जी, इमरान, देवेन्द्र जी, शिखा जी, आप सभी का स्वागत व आभार !

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  6. झलक रही नन्हें पादप में
    एक चेतना एक ललक,
    कहता किस अनाम प्रीतम हित
    खिल जाऊँ उडाऊं महक !

    बहुत ही सुंदर प्रस्तुति.

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