शुक्रवार, मई 17

मृत्यु एक पड़ाव भर है


मृत्यु एक पड़ाव भर है

जन्म के पीछे छिपी है मृत्यु
ज्ञानी तत्क्षण देख रहा है,
नई यात्रा पर जाना है  
मृत्यु एक पड़ाव भर है !

जग यह इक दिन खो जायेगा
धूल में मिल जायेगा सब धन,   
अंधकार में छिपा उजाला
छिपा जरा में है नव यौवन !  

होती जब धौंकनी खाली
शक्ति से फिर भर जाती,
सांसे जब बाहर जाती हैं  
तब ही तो भीतर आतीं !  

हर श्वास पर मरता मानव
हर श्वास जीवन दे देती,
जीकर मरना, मरकर जीना
दो पैरों पर होती है गति !

यहाँ जिंदगी पल-पल देती
खालीपन भी भर जायेगा,
भरा हुआ पर जो पहले से
कैसे वह कुछ भी पायेगा !

हर क्षण जग खिलता-मिटता है
प्रेम में नफरत का पुट होता,
द्वन्द्वों से ही सृष्टि चलन है
सुख मोती दुःख तार पिरोता ! 

23 टिप्‍पणियां:

  1. मृत्यु एक सरिता है जिसमें ,श्रम से कातर जीव नहा कर,
    फिर नूतन धारण करता है काया रूपी वस्त्र बहाकर !

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    1. प्रतिभा जी, बहुत सुंदर पंक्तियाँ लिखी हैं आपने..आभार!

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  2. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार(18-5-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

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  3. सार्थक प्रस्तुति!!सादर ....

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  4. यहाँ जिंदगी पल-पल देती
    खालीपन भी भर जायेगा,
    भरा हुआ पर जो पहले से
    कैसे वह कुछ भी पायेगा !...बहुत सुन्दर भाव..

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  5. बहुत सुंदर भाव.....दार्शनिक सोंदर्य से भरी रचना
    धन्यवाद...

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  6. आपने लिखा....हमने पढ़ा
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए कल 19/05/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    धन्यवाद!

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    साझा करने के लिए आभार!

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  8. हर श्वास पर मरता मानव
    हर श्वास जीवन दे देती,
    जीकर मरना, मरकर जीना
    दो पैरों पर होती है गति !
    बेहतरीन....

    सादर
    अनु

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  9. जीवन भी तो एक पढाव ही है ... ए पढाव से दूसरे में जाना फिर जाना ...
    दार्शनिक भाव लिए ...

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  10. बढ़िया प्रस्तुति !
    डैश बोर्ड पर पाता हूँ आपकी रचना, अनुशरण कर ब्लॉग को
    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    latest postअनुभूति : विविधा
    latest post वटवृक्ष

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  11. जग यह इक दिन खो जायेगा
    धूल में मिल जायेगा सब धन,
    अंधकार में छिपा उजाला
    वर्तमान का सच तो यही है-------

    जीवन का सच
    मन को स्पर्श करती रचना
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बधाई


    आग्रह है पढ़ें "बूंद-"
    http://jyoti-khare.blogspot.in


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  12. हर क्षण जग खिलता-मिटता है
    प्रेम में नफरत का पुट होता,
    द्वन्द्वों से ही सृष्टि चलन है
    सुख मोती दुःख तार पिरोता !
    जीवन की बड़ी सच्चाई से सामना कराती सुन्दर प्रस्तुति.

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  13. आप सभी सुधी जनों का स्वागत व आभार!

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