सोमवार, जून 27

माया द्वन्द्वों का है खेल

माया द्वन्द्वों का है खेल


माया मनमोहक अति सुंदर
किन्तु बाँधती मोह पाश में,
सुख का देती है आश्वासन
जीवन कटता इसी आश में !

माया द्वन्द्वों का है खेल
सुख-दुःख के झूले में झुलाती,
कभी हिलोरें लेता है मन
फिर खाई में इसे गिराती !

माया सदा भुलावा देती
कर्मों में उलझाया करती,
दौड़भाग कर कुछ तो पा लो
सुख से रहना, गाया करती !

माया के दंश मीठे हैं
किन्तु क्षणिक बस पल भर के हैं,
मृगतृष्णा या मृग मरीचिका
तुहिन बिंदु से कण भर के हैं !

किन्तु एक शाश्वत जीवन
नित नूतन प्रेम का वर्षण,
मायापति का यदि हो वन्दन
पल-पल वर्धित ऐसा गुंजन !




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