गुरुवार, मार्च 2

शब्द और अर्थ



शब्द और अर्थ



कहते-सुनते, लिखते-पढ़ते
बीत गये युग-युग, फिर भी
नये-नये ही अर्थ दे रहे
शब्द रहे नित नूतन ही !

प्रेम जिसे कहते थे पहले
माने उसके बदल गये अब,
भक्ति नहीं अब मने मनौती
मंदिर में व्यापार चले जब !

कुनबा कहते ही आँखों में
दादी, नानी  लगें झलकने,
किस नाम से इसे पुकारें
दो जन रहते दो कमरों में !








कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें