मंगलवार, मार्च 7

रंग चुरा के कुछ टेसू के




 रंग चुरा के कुछ टेसू के

सुरभि भरे निज आंचल में फिर 
गीत गा रही  पवन बसंती,
नासापुट की खत्म प्रतीक्षा 
भीगा उर फागुन  की मस्ती !

कंचन झूमा, खिला पलाश 
बौराया आम्रवन सारा,
आड़ू, नींबू सभी महकते 
कामदेव ने किया इशारा ! 

एक तरफ झरते हैं पत्ते 
नव कोमल पल्लव उग आते,
जीवन-मृत्यु संग घट रहे 
महुआ चूता भंवरे गाते !

कुसुमित प्रमुदित खिली वाटिका
ऋतुराज रचता रंगोली,
  रंग चुरा के कुछ टेसू के 
क्यों न खेलें पावन होली !



7 टिप्‍पणियां:

  1. होली की शुभकामनाएं । सुन्दर रचना।

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  2. स्वागत व आभार सुशील जी ! आपको भी रंगों के पर्व की शुभकामनायें !

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  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 09-03-2017 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2603 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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    1. स्वागत व बहुत बहुत आभार दिलबाग जी !

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  4. गहन अर्थ संजोये बहुत सुन्दर शब्द चित्र...होली की अग्रिम शुभकामनाएं

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