गुरुवार, मार्च 15

किसने खिलकर किये इशारे



किसने खिलकर किये इशारे


पी पी कह कर कौन पुकारे
किसे खोजते नयन तुम्हारे,
अंतर सरस तान बन गूँजा
किसने खिलकर किये इशारे !

हल्का-हल्का सा स्पंदन है
सूक्ष्म, गहन उर का कम्पन है,
जाने कौन उसे पढ़ लेता
चुप हो कहती जो धड़कन है !

मधुर रागिनी सा जो बिखरा
रस में पगा स्वाद मिश्री का,
तृप्त करे फिर तृषा जगाए
जादूगर वह कौन अनोखा !

एक तिलस्म राज इक गहरा
किसके चाहे खुलता जाता,
साया बनकर साथ सदा है
कौन प्रीत का गीत सुनाता !

सिहरन कब सम्बल बन जाती
भटकन कब मंजिल पर लाती,
कौन ख्वाब बन झलक दिखाता
किसकी चाह पूर्णता लाती !


8 टिप्‍पणियां:

  1. शब्द शब्द भावों का अनमोल झरना !! बहुत खूब !!

    उत्तर देंहटाएं
  2. स्वागत व आभार अनुपमा जी !

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन जल बिना जीवन नहीं : ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

    उत्तर देंहटाएं
  4. आलोकित ... अंतस के भाव में जागी आकांक्षा जब मुक्त हो के विचरित करती है तो ढूँढ ही लेती है स्वयं का मार्ग ...

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. सही कहा है आपने..आभार दिगम्बर जी !

      हटाएं