शनिवार, जून 6

चिंगारी प्रेम की

 चिंगारी प्रेम की 

प्रेम कविताएँ और कहानियाँ 

पढ़ी जाती हैं, रची जाती हैं, सुनायी जाती हैं 

क्योंकि प्रेम की जो नन्हीं सी चिंगारी 

छिपी है हरेक मन में 

उसे हवा देकर पल भर को सुलगाती हैं 

या कोई मन छिपाये हो भीतर

 प्यार की सुवास 

वह बिखर जाती है

 किसी अनजान पल में 

जब वह सचेत नहीं है 

रक्षा नहीं कर रहा है 

पहरे पर नहीं खड़ी है बुद्धि 

प्रेम कहो, सुनो या पढ़ो 

यदि रच नहीं सकते 

निज जीवन में भी प्रेम का बसंत छायेगा 

इन्हीं नयनों से इंतज़ार किया था 

सपनों से भरा था मन का आँगन 

वह पुन: नज़र आएगा 

प्रेम पावन है 

क्योंकि प्रेम दान है 

पूजा है अर्पण है ! 

 

12 टिप्‍पणियां:

  1. सच है प्रेम पावन है ... पवित्र है ... छूने पे फ़ैल जाता है ...

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  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर सोमवार 08 जून 2026 को लिंक की गयी है....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

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  3. प्रेम की जो नन्हीं सी चिंगारी
    छिपी है हरेक मन में
    अकाट्य सत्य की रचना ❤️

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  4. अत्यंत भावपूर्ण, कोमल और आत्मा को स्पर्श करने वाली रचना। कविता पढ़ते हुए लगा जैसे प्रेम कोई भावना नहीं, बल्कि एक शांत, पवित्र उपस्थिति है जो हर मन में रहती है। "प्रेम पावन है क्योंकि प्रेम दान है, पूजा है, अर्पण है" — कितनी सुंदर और गहन अभिव्यक्ति! कुछ शब्दों में प्रेम का इतना व्यापक दर्शन समेट देना सचमुच अद्भुत है।

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    1. वाक़ई प्रेम कोई भावना नहीं, एक उपस्थिति है ! इसको महसूस करना ही शायद हर किसी का ख़्वाब है, स्वागत व आभार!

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