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रविवार, फ़रवरी 6

वासन्ती हवा

वासन्ती हवा


धूप ने पिया जब फूलों का अर्क

भर गयी ऊर्जा उसके तन-बदन में....

कल तक नजर आती थी जो कृश और कुम्हलाई

आज कैसी खिल गयी है...

वसंत के आने की खबर उसको भी मिल गयी है !


वसुधा ने भी ली है अंगड़ाई

भर दिया सहज  वनस्पतियों में यौवन

सिकुड़ी, सूखी सी दिखती थीं जो डालें कल तक 

पल्लवों से मिल गयी है

वसंत के आने की खबर उसको भी मिल गयी है !


पाले में ढके, कोहरे में खेत

झूमते पा परस वासन्ती हवा का

चुप सी खड़ी थी जो सरसों की हर वह कली कल 

फूल बन घर से गयी है

वसंत के आने की खबर उसको भी मिल गयी है !


उर में हुलस उठी बाल-युवा सभी 

शीत से बेहाल घरों में क़ैदी थे  , 

हुल्लड मचाने टोली उनकी मिलजुल कर आज 

दोस्तों के घर गयी है

वसंत के आने की खबर उसको भी मिल गयी है !


शुक्रवार, मई 1

आज मजदूर दिवस है

आज मजदूर दिवस है 


आएं, श्रम का हम सम्मान करें 
कर्मठ मजदूरों का मान करें 
जिनके बल पर बनती हैं सड़कें 
महल-दुमहले उठ जाते नभ में देखते-देखते 
हजारों मीलों तक रेलों की पटरियां बिछतीं
बीहड़ जंगलों से जो गुजरतीं 
कूप गहरे तेल के या जल के भी हों 
खोदने में पल भर की ना देरी लगाते 
खेत-खलिहान में काम जुटे रात-दिन  
धूप-वर्षा, शीत लहर सहते
आज वे बेघर हुए या घरों से दूर 
महामारी के सताये 
जाने कैसा जीवट उनके मनों की 
गहराई में वास करता 
नहीं,  संभव नहीं कि,  कभी उनके 
श्रम का प्रतिदान कुछ हम दे सकें 
कम से कम अदम्य साहस सराहें 
देखकर अप्रतिम योगदान उनका 
देश के चहुँमुखी विकास में 
आज कर्मवीर कहकर पुकारें !

शुक्रवार, मई 26

शस्य श्यामला मातरम्


शस्य श्यामला मातरम्

लबालब भरे हैं पोखर अमृत जल से
हरियाली का उतरा समुन्दर जैसे
दूर क्षितिज तक फैले गहरे हरे वन 
देख-देख ठंडक उतर जाती भीतर
कदली वन.. बांस के झुरमुट
धान और अरहर के खेत
कीचड़ सने पाँव कई गाते रहे होंगे गीत
सुंदर अरहर की पूलियां
मानो किसी चित्रकार की आकृतियाँ
नील गगन पर श्वेत मेघ की पूनियां
सुपारी के नारंगी फूल महकते 
पोखर में झाँकता गगन
वृक्षों-पादपों के मोहक प्रतिबिम्ब
मानो बालक-बालिकाएं पंक्तिबद्ध