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रविवार, जनवरी 29

गुंजार

 गुंजार 


तू भेज रहा है प्रेम पाती 

हर क्षण  मेरे प्रभु !

हम पढ़ते ही नहीं 

क्योंकि संसार की

उलझनों में खोए हैं 

तू जगा रहा है निज गुंजार से 

और हम न जाने

किन अंधेरों में सोए हैं 

एक क्षण के लिए

तुझसे नयन मिलते हैं तो 

हज़ार फूलों की

डालियाँ झर जाती हैं 

तेरी याद में 

पवन अपने संग 

उन अदृश्य फूलों का

पराग ले आती है 

शुक्रिया तेरे उस स्पर्श का 

जो भर जाता है

मन में पुनः विश्वास 

थिर हो जाती है

आती-जाती हर श्वास !