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बुधवार, सितंबर 13

दूर और पास

दूर और पास 


वे साथ रह सकते थे 

पर रहते नहीं थे 

क्योंकि उनके दिल साथ थे 

हो सकता है 

साथ रहने पर दूर हो जाते दिल से 

वे दू….र थे इसलिए.. निकट थे 

यदि आ जाते निकट 

तो शायद…..

क्योंकि यदि दिन के बाद 

रात कभी न भी आये 

तो भी हर रात के बाद 

दिन अवश्य आता है 

धरा से दूर है चंदा 

इसलिए उसके चक्कर लगाता है ! 


गुरुवार, अगस्त 26

दूर और पास

 दूर और पास 

दूर से सूरज की आभा में 

 नीला पर्वत लग रहा था मोहक 

और उसके नीचे फैला हरा

मैदान बुला रहा था 

पर तपती दोपहरी में 

चला नहीं जाता पर्वत पर 

और मैदान के कंटक पैरों में चुभते थे 

थोड़ी सी दूरी तो चाहिए न 

आकर्षण बनाये रखने के लिए 

नील नभ पर बादल भले लगते हैं 

पर फट कर आंगन में गिर जाएँ तो दुःख देते हैं 

बच्चा नहीं जानता वह माँ के निकट है 

अलिप्त है सो सुंदर है उनके मध्य बहता प्रेम 

ज्यादा निकटता

कुरूपता को जन्म दे सकती है 

मान लेना ही काफी है 

 ‘वह’ सदा हमारे साथ है 

शायद उससे दूरी ही 

उसके प्रति प्रेम को बनाये रखती है ! 


गुरुवार, मई 8

आना-जाना

 आना-जाना

न कोई किसी से दूर जाता है
न कोई किसी के पास आता है,
स्वयं से दूर और स्वयं के पास
हर मानव यहाँ आता-जाता है !

केंद्र से परिधि की यात्रा चलती है
दिन भर हलचल परिधि पर घटती है,  
निद्रा में केन्द्र पर विश्राम पाता है
थका हारा जब अपने घर जाता है !