सोमवार, मई 17

दुलियाजान में गुरूजी

दुलियाजान में गुरूजी

सुनो सुनो क्या हवा कह रही
कानों में चुपके से आकर
आने वाला है जादूगर
भरने प्रीत से मन की गागर

सूर्य गगन धरा व पंछी
पुलकित होकर हुए तृप्त हैं
एक ही सुर में सभी कह रहे
चाह उसी की जो मुक्त है

मुक्त सदा जो हर बंधन से
दुःख पीड़ा से छोटे मन से
सुख, शांति आनंद रूप वह
चिन्मय हो आया कण कण से

वह जो करुणा रूप बुद्ध का
झलकाए नानक की खुमारी
मस्त हुआ है जो कबीर सा
गूंज रहा बन कृष्ण बांसुरी

मीरा सी भक्ति है जिसमें
महावीर सा ज्ञान अनूठा
शंकर का अद्वैत पी गया
रामकृष्ण सी सहज सरलता

फौलादी विश्वास का मालिक
फूल सा कोमल बालक जैसा
प्रखर बुद्धि अद्भुत योगी है
स्नेह लुटाता पालक जैसा

चकित हुए सब दीवाने भी
सबके दिल में घर कर लेता
दुलियाजान बिछाये पलकें
राह उसी की देखा करता


अनिता निहलानी
२१ फरवरी २०१०
दुलियाजान, असम

11 टिप्‍पणियां:

  1. वाह! बहुत सुन्दर प्रस्तुति, तो दुलिआजान में भी ब्लॉगर हैं! बहुत खुशी की बात है!

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  2. हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

    मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

    यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

    शुभकामनाएं !


    "टेक टब" - ( आओ सीखें ब्लॉग बनाना, सजाना और ब्लॉग से कमाना )

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  3. आपका लेख पढ़कर हम और अन्य ब्लॉगर्स बार-बार तारीफ़ करना चाहेंगे पर ये वर्ड वेरिफिकेशन (Word Verification) बीच में दीवार बन जाता है.
    आप यदि इसे कृपा करके हटा दें, तो हमारे लिए आपकी तारीफ़ करना आसान हो जायेगा.
    इसके लिए आप अपने ब्लॉग के डैशबोर्ड (dashboard) में जाएँ, फ़िर settings, फ़िर comments, फ़िर { Show word verification for comments? } नीचे से तीसरा प्रश्न है ,
    उसमें 'yes' पर tick है, उसे आप 'no' कर दें और नीचे का लाल बटन 'save settings' क्लिक कर दें. बस काम हो गया.
    आप भी न, एकदम्मे स्मार्ट हो.
    और भी खेल-तमाशे सीखें सिर्फ़ "टेक टब" (Tek Tub) पर.
    यदि फ़िर भी कोई समस्या हो तो यह लेख देखें -


    वर्ड वेरिफिकेशन क्या है और कैसे हटायें ?

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  4. "चकित हुए सब दीवाने भी
    सबके दिल में घर कर लेता
    दुलियाजान बिछाये पलकें
    राह उसी की देखा करता"
    शब्द संयोजन और भाव अति सुंदर.
    दुलियाजान जगह का नाम मैंने तो पहली बार सुना है - धन्यवाद्

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  5. sundar, shubhkamnao ke sath swagat hai hindi blog jagat me..

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  6. चकित हुए सब दीवाने भी
    सबके दिल में घर कर लेता
    दुलियाजान बिछाये पलकें
    राह उसी की देखा करता

    पहली बार आय आपके ब्लॉग पर ...अच्छा लगा ..बहुत सुन्दर रचना है ...एक सुन्दर अभिव्यक्ति .....ऐसे ही लिखते रहे .....बधाई स्वीकारे

    http://athaah.blogspot.com/

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  7. bahut hi badhiya likha hai aapnae.

    mere blog ko bhi padhe.aur apana view jaroor likhe.
    http://www.mukeshgkp.blogspot.com/

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  8. वाकई उम्दा लिखती हैं आप।
    चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है। हिंदी ब्लागिंग को आप और ऊंचाई तक पहुंचाएं, यही कामना है।
    यहां पधार सकती हैं -
    http://gharkibaaten.blogspot.com

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  9. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  10. अच्छी है आपकी कविता...सच....!!!

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  11. " बाज़ार के बिस्तर पर स्खलित ज्ञान कभी क्रांति का जनक नहीं हो सकता "

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