सोमवार, फ़रवरी 4

गीत आज ही गाया है


गीत आज ही गाया है

पहले तो आहट भर थी
शायद अब वह आया है,
पहले बस तुतलाहट थी  
गीत आज ही गाया है !

सोए-सोए स्वप्न देखते
किसने उसको पाया है,
तम निद्रा से जो जागा
उसे ही केवल भाया है !

देख सकें, न पड़े दिखाई
जो सर्वत्र समाया है,
सुना नहीं जाता उसका स्वर
शून्य ही उसकी छाया है !

जीवन एक लहर सागर की
सागर सा गहराया है,
इस अनंत में सांत वही है
भेद अनोखा जाया है !


14 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया प्रस्तुति |
    बधाई स्वीकारें ||

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  2. जीवन एक लहर सागर की
    सागर सा गहराया है,
    इस अनंत में सांत वही है
    भेद अनोखा जाया है !

    सुन्दर भाव गीत बेहद सशक्त अभिव्यक्ति .(इस अनंत में शांत वही है )

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    1. वीरू भाई, स्वागत व आभार ! सांत=स+अंत अर्थात अंत सहित

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  3. बहुत ही सुन्दर गीत ... आलोकिक भाव लिए ...

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  4. बहुत बहुत सुन्दर व आशामई पोस्ट।

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  5. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार 5/2/13 को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहां हार्दिक स्वागत है
    दो

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  6. तुतलाते-तुलाते ही तो गाना गाने आ जाता है. साथ में हम भी गुनगुना रहे हैं.

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    1. अमृता जी, आपकी गुनगुन से तो गीत भी धन्य हो गया..

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  7. पहले तो आहट भर थी
    शायद अब वह आया है,
    पहले बस तुतलाहट थी
    गीत आज ही गाया है ....बहुत अच्‍छी लगी..

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  8. दिगम्बर जी,संगीता जी, यशवंत व इमरान आप सभी का स्वागत व आभार !

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