सोमवार, फ़रवरी 25

जीवन दो का है खेल सदा


जीवन दो का है खेल सदा


खिलते काँटों संग पुष्प यहाँ
है धूप जहाँ होगी छाया,
हत्यारा गर तो संत भी है
है ब्रह्म जहाँ होगी माया !

हो तिमिर सघन, घनघोर घटा
रवि किरणें कहीं संवरती हैं,
जो आज चुनौती बन आयी
कल बदली बनी बरसती है !

जीवन दो का है खेल सदा
हर क्षण में दूजा मरण छिपा,
इक श्वास जो भीतर भर जाती
बाहर जाती ले रही विदा !

जो पार हुआ तकता दो को
वह खेल समझता है जग का,
इस ऊंच-नीच के झूले से
वह कूद उतरता खा झटका !  

है शुभ के भीतर छिपा अशुभ
शत्रु बन जाते मित्र घने,
न स्वीकारा जिसने सच यह
विपदा के बादल रहे तने !

सुख की जो बेल उगाई थी
कटु फल दुःख के लगते उस पर,
जीवन में छिपा मरण पल-पल
मन करता गर्व यहाँ किस पर !  

18 टिप्‍पणियां:

  1. सुख की जो बेल उगाई थी
    कटु फल दुःख के लगते उस पर,
    जीवन में छिपा मरण पल-पल
    मन करता गर्व यहाँ किस पर !
    बहुत सुन्दर दार्शनिक भाव
    latest postमेरी और उनकी बातें

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  2. बहुत ही सुन्दर रचना ... जितना सारगर्भित सन्देश, उतने ही सुन्दर शब्दों से पिरोया हुआ भी। कभी कभी ही ऐसी रचनाएँ पढने को मिलती हैं।
    सादर
    मधुरेश

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  3. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार26/2/13 को चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका हार्दिक स्वागत है

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  4. जीवन दो का है खेल सदा
    हर क्षण में दूजा मरण छिपा,
    इक श्वास जो भीतर भर जाती
    बाहर जाती ले रही विदा !...........बहुत ही भावपूर्ण रचना .........

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  5. ये खेल समझ में आता तो है पर भूल कर खेलने में न जाने कैसा रस मिलता है..

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    1. अमृता जी, एक बार इस खेल के जो पार हो जाता है उसको मिलने वाले रस का कहना ही क्या..

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  6. है शुभ के भीतर छिपा अशुभ
    शत्रु बन जाते मित्र घने,
    न स्वीकारा जिसने सच यह
    विपदा के बादल रहे तने ..

    सच कहा है .. जो इस दो के खेल को समझ जाता है भवसागर पार होना आसान हो जाता है ...

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  7. सुख और दुःख , जीवन और मृत्यु.......सदा विपरीत हैं यहाँ...........अद्भुत कविता.......

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  8. सुख की जो बेल उगाई थी
    कटु फल दुःख के लगते उस पर,
    जीवन में छिपा मरण पल-पल
    मन करता गर्व यहाँ किस पर !

    बेहद खूबसूरत रचना ...
    बधाई आपको !

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  9. सुख की जो बेल उगाई थी
    कटु फल दुःख के लगते उस पर,
    जीवन में छिपा मरण पल-पल
    मन करता गर्व यहाँ किस पर !

    ...बहुत सार्थक और प्रभावी अभिव्यक्ति...आभार

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  10. दिनेश जी, सतीश जी, दिगम्बर जी, कैलाश जी व इमरान आप सभी का स्वागत व आभार !

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