बुधवार, दिसंबर 9

जीवन


जीवन


दुःख जैसा लगता ऊपर से
भीतर सुख की खान छिपाए
जीवन एक तिलिस्म अनोखा !

सदा विरोधी सा लगता पर
दिवस ही संध्या में ढल जाये
जीवन एक मिलन अनोखा !

मौन खड़ा पर्वत भी मुखरित
निर्झर मुख से गीत सुनाये
जीवन एक नाद अनोखा !

मृदु से मृदु स्वाद मिल सकता
तिक्त फलों को भी उपजाए
जीवन एक सृजन अनोखा !




4 टिप्‍पणियां:

  1. जीवन का यह विरोधाभास ही एक आकर्षण है जीवन का...बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति...

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  2. Sounds like sorrow over
    Well hidden within the mine
    Life is a unique... Life is like a river it will find its path.. सरकारी नौकरी

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  3. वाह ! शानदार पंक्तियाँ है। बेहतरीन रचना ...

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  4. कैलाश जी, सिराज जी व प्रसन्न जी, आप सभी का स्वागत व आभार !

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