गुरुवार, जुलाई 28

नाम प्रेम का लेकर

नाम प्रेम का लेकर


उससे मिलकर जाना हमने
प्यार किसे कहते हैं,
नाम प्रेम का लेकर कितने,
 खेल चला करते हैं !

चले हुकूमत निशदिन उस पर,
 जिसको अपना माना,
मैं ही उसका रब हो जाऊं
और न कोई ठिकाना !

नहीं प्रेम में कोई बंधन
मुक्त गगन के जैसा,
सब पर सहज मेह सा बरसे
मुक्त पवन के जैसा !  

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही खूबसूरत और सार्थक।
    रोज़ मरता है प्यार
    प्यार के नाम पर
    जरूरते हो चली मोहोब्बत
    हर जुबाँ पर

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  2. नहीं प्रेम में कोई बंधन
    मुक्त गगन के जैसा,
    सब पर सहज मेह सा बरसे
    मुक्त पवन के जैसा !

    बहुत खूबसूरत...

    उत्तर देंहटाएं