गुरुवार, फ़रवरी 1

कल जो चाहा आज मिला है

कल जो चाहा आज मिला है


भय खोने का, पाने का सुख
मन को डाँवाडोल करेगा,
अभय हृदय का, वैरागीपन
पंछियों में उड़ान भरेगा !

मंजिल की है चाह जिन्हें भी
कदमों को किसने रोका है,
बाधाएँ भी रची स्वयं ने
सिवा उसी के सब धोखा है !

कल जो चाहा आज मिला है
कौन शिकायत करता खुद की,
निज हाथों से पुल तोड़े हैं
नौका डूब रही अब मन की !

जीवन एक विमल दर्पण सा
जस का तस झलकाता जाता,
नयन मूंद ले कोई कितने
अंतर राग बरस ही जाता !

17 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन खुशवंत सिंह और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  2. बहुत बहुत आभार हर्षवर्धन जी !

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  4. आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'सोमवार' ०५ फरवरी २०१८ को साप्ताहिक 'सोमवारीय' अंक में लिंक की गई है। आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

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  5. I like very much this. Thanks for this. daily news पढ़ने के लिए इस वेबसाइट को देखें। Latest News by Yuva Press India

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  6. वाह
    बहुत सुंदर सृजन
    सादर

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  7. सुंदर भावपूर्ण ... आशा भाव लिए

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