बुधवार, जुलाई 14

मौन

मौन 

एक नज़र ही काफ़ी है 

किसी के दिल का हाल जानने के लिए 

एक मुस्कान भरा आश्वासन 

एक शांत मुद्रा 

शब्दों की एक सीमा है 

जो नि:शब्द को पढ़ लेता है 

वह मुक्ति की तरफ कदम बढ़ा रहा है 

प्रकृति चुप रहकर भी मुखर है 

चाँद हजार सालों से बातें करता है प्रेमियों से 

हवा कानों में कुछ कह जाती है 

नदी बोलती है 

पेड़ और पुष्प भी 

हम भूल गए हैं चुप्पी की भाषा

दिन भर कानों में लगाए इयरफोन 

दिल की आवाज़ भी नहीं सुन पाते 

परम मौन है 

उसे मौन में ही सुना जाता है !



12 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 15-07-2021को चर्चा – 4,126 में दिया गया है।
    आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी।
    धन्यवाद सहित
    दिलबागसिंह विर्क

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  2. वाह , निशब्द को पढ़ना आसान है अगर मन पढ़ना चाहे !

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  3. वाह!बहुत सुंदर सराहनीय सृजन।
    सादर

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  4. जो निःशब्द पढ़ ले वो मुक्ति की ओर कदम बढ़ा लेता है ..... बहुत गहन विचार

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  5. दिल की आवाज़ को मौन हो के सुना जा सकता है ...
    पर दिल की आवाज़ तो सच होनी चाहिए ... कितने मुखौटे हैं आज ...

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    1. दिल तो सच ही बोलता है, दिमाग़ है जो बाधा बन जाता है

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  6. मौन की भाषा को समझ लेना निस्संदेह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। अच्छे विचार प्रस्तुत किए हैं आपने।

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