सोमवार, जुलाई 18

जब याद कमल सर खिलता है

जब याद कमल सर खिलता है


तू हर उस पल में मिलता है 

जब याद कमल सर खिलता है, 

नहीं अतीत न भावी में ही 

दर्पण दर्शन का मिलता है !


मन जो नित भागा ही रहता 

कही हुई को फिर-फिर कहता, 

व्यर्थ कल्पना महल बनाए 

इस पल में ना कभी झाँकता !


जिसके पीछे ही अनंत इक 

अमन समंदर लहराता है, 

उस पल का उर बने आवरण 

जाने क्यों स्वयं को छल रहा !


8 टिप्‍पणियां:

  1. काश ! इस पल को ही ध्यान में रख पाएँ ।

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    1. अवश्य रख पाएँगे, मन में भाव होना चाहिए

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  2. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (18-7-22}
    को सैनिकों की बेटियाँ"(चर्चा अंक 4495)
    पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
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    कामिनी सिन्हा

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  3. दर्पण दर्शन में मिलता है, सुंदर रचना

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  4. रंजू जी, अनीता जी व जिज्ञासा जी, आप सभी का स्वागत व हृदय से आभार!

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