शनिवार, जुलाई 30

शुभ कर्मों का बहे मकरंद

शुभ कर्मों का बहे मकरंद

​​चेतन अमर, अजर, अविनाशी 

प्रेम, शांति व हर्ष का सागर, 

अहंकार बिंधता स्वयं से 

अहंकार सीमित सम कायर !


जीवन जैसा है, वैसा है 

अहम उसे  स्वीकार न पाए,  

निज झूठी शान की ख़ातिर 

लोकमत का शिकार हो जाए ! 


सीधी, सरल चेतना निर्मल 

अहंकार कई दाँव खेले,  

झूठ की कई दीवारों में  

अपने हाथों क़ैदी हो ले ! 


क़ैद हुआ उनमें फिर खुद ही  

कसता, घुटता, पीड़ित होता, 

सच की एक मशाल जलाकर 

अंधकार चैतन्य हटाता  !


जय वहीं जहाँ सत्य पनपता 

जीवन सत्य  की खोज अनंत,

सत्य का पुष्प खिलेगा, जहाँ 

शुभ कर्मों का बहे मकरंद !


13 टिप्‍पणियां:

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    1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  2. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" रविवार 31 जुलाई 2022 को साझा की गयी है....
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. जहाँ शुभ कार्य होंगे वहीं सत्य होगा ...... खूबसूरत रचना ।

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  4. बहुत ही सुंदर, प्रेरक रचना ।

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  5. वाह लाजबाव अभिव्यक्ति

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  6. जय वहीं जहाँ सत्य पनपता

    जीवन सत्य की खोज अनंत,

    सत्य का पुष्प खिलेगा, जहाँ

    शुभ कर्मों का बहे मकरंद !
    सुंदर प्रस्तुति आदरणीय ।

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  7. जिज्ञासा जी, भारती जी, सतीश जी, अनामिका जी व दीपक जी आप सभी का स्वागत व हृदय से आभार!

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