आजादी बनाम गुलामी
अच्छा लगता है न यह सुनकर कि.....
गुलाम नहीं है कोई देश किसी दूसरे देश का
आज की दुनिया में !
कि.......
सबको अधिकार है अपना शासन खुद करने का
सही है कि हथियारों के बल पर नहीं जीतता
कोई मुल्क दूसरे मुल्क को
पर चीन के सस्ते मॉल से
जो अटे पड़े हैं दुनिया के बाजार
पश्चिमी संस्कृति की गुलाम होती जा रही है
एशियाई पीढियां...
मोबाईल... आईपॉड,...आई फोन
के मोह में... गुलाम बनते जा रहे हैं नन्हे बच्चे तक !
सतही धारावाहिकों की गुलाम हो गयी एक पूरी पीढ़ी
किसे पता चला....
गावों के कृषक भी कहाँ मुक्त हैं
नई तकनीक के गुलाम बन
भुला बैठे हैं सदियों पुरानी खेतीबाड़ी
जमीन रसायनों की गुलाम हुई जाती है...
सब्जियां कीटनाशकों की....
गुलामी की शक्ल भर बदल गयी है...
भारी ऋण के तले दबे हैं
तथाकथित विकसित देश भी
कौन आजाद है यहाँ...?