गुरुवार, सितंबर 8

आजादी बनाम गुलामी


आजादी बनाम गुलामी

अच्छा लगता है न यह सुनकर कि.....
गुलाम नहीं है कोई देश किसी दूसरे देश का
आज की दुनिया में !
कि.......
 सबको अधिकार है अपना शासन खुद करने का
सही है कि हथियारों के बल पर नहीं जीतता
कोई मुल्क दूसरे मुल्क को
पर चीन के सस्ते मॉल से
जो अटे पड़े हैं दुनिया के बाजार
पश्चिमी संस्कृति की गुलाम होती जा रही है
एशियाई पीढियां...
मोबाईल... आईपॉड,...आई फोन
के मोह में... गुलाम बनते जा रहे हैं नन्हे बच्चे तक !
सतही धारावाहिकों की गुलाम हो गयी एक पूरी पीढ़ी
किसे पता चला....

गावों के कृषक भी कहाँ मुक्त हैं
नई तकनीक के गुलाम बन
भुला बैठे  हैं सदियों पुरानी खेतीबाड़ी
जमीन रसायनों की गुलाम हुई जाती है...
सब्जियां कीटनाशकों की....

गुलामी की शक्ल भर बदल गयी है...
भारी ऋण के तले दबे हैं
तथाकथित विकसित देश भी
कौन आजाद है यहाँ...?

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत गहरी और सच्ची पोस्ट............सच सब कुछ ही बदल गया है.........नहीं बदले तो हमारे जैसे कुछ गिने-चुने लोग......कभी लगता है जैसे वक़्त हम जैसों को कहीं पीछे न छोड़ जाये|

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  2. सही बात कही आपने कि अब गुलामी शक्ल सिर्फ बदली है। ये आज़ादी नहीं बल्कि एक आज़ादी का एक भ्रम मात्र है।

    सादर

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