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शुक्रवार, सितंबर 15

तानाशाही

तानाशाही 


निरंकुश सरकारों का 

दमन चक्र 

जब चलता है 

न जाने कितने देशों में 

 मानवाधिकारों का हनन करता है

 पार कर जाते हैं 

जब तानाशाह 

क्रूरता की हदें 

पिसती है बेक़सूर जनता 

जो विरोध तक नहीं जता पाती 

और चंद लोग 

जो आवाज़ उठाते हैं 

कुचल दी जाती है उनकी ताक़त 

डरा-धमका कर 

या कभी जान भी लेकर 

ऐसी सरकारें स्वतंत्र होकर भी 

स्वतंत्र नहीं होतीं 

वे भी किन्हीं के इशारों पर चलती हैं 

 उनके मालिक होते हैं 

अहं और लोभ

हिंसा और दमन उनके अस्त्र 

तब यूएनओ भी 

साक्षी बना रहता है 

क्योंकि वहाँ बैठे ज़्यादा लोग आते हैं 

ऐसे  मुल्क  से 

जो मानता है स्वयं को दुनिया का पैरोकार 

 सत्ता कोई भी सँभाले 

आ जाता है उसे 

दुनिया को चलाने का अधिकार !






शुक्रवार, मार्च 24

एक मुल्क


एक मुल्क 


जैसे कोई जल 

विलग हो जाए 

बहते दरिया से 

तो सूखने लगता है 

वैसे ही झुलस रहा है एक मुल्क 

अपने स्रोत से बिछड़ा 

खानाबदोश सा कोई परिवार 

या माता-पिता से रूठा 

नाफ़रमाबरदार बेटा 

जो अगर घर से खतो-किताबत 

 भर शुरू कर दे 

भले न लौटे घर 

तो हालात सुधरने लगते हैं 

प्रेम का रक्त दौड़ने लगता है 

उसकी रगों में 

जिसकी आँच पिघला देती है 

सारी जड़ता 

जो कभी दो थे ही नहीं 

एक ही थे 

वे कैसे पनप सकते हैं अलग होके 

जो एक साज़िश का परिणाम था 

वह स्नेह की छुअन से ही 

हो सकता है पुनर्जीवित 

वह मुल्क कौन सा है 

यह आप भी जानते हैं ! 




गुरुवार, सितंबर 8

आजादी बनाम गुलामी


आजादी बनाम गुलामी

अच्छा लगता है न यह सुनकर कि.....
गुलाम नहीं है कोई देश किसी दूसरे देश का
आज की दुनिया में !
कि.......
 सबको अधिकार है अपना शासन खुद करने का
सही है कि हथियारों के बल पर नहीं जीतता
कोई मुल्क दूसरे मुल्क को
पर चीन के सस्ते मॉल से
जो अटे पड़े हैं दुनिया के बाजार
पश्चिमी संस्कृति की गुलाम होती जा रही है
एशियाई पीढियां...
मोबाईल... आईपॉड,...आई फोन
के मोह में... गुलाम बनते जा रहे हैं नन्हे बच्चे तक !
सतही धारावाहिकों की गुलाम हो गयी एक पूरी पीढ़ी
किसे पता चला....

गावों के कृषक भी कहाँ मुक्त हैं
नई तकनीक के गुलाम बन
भुला बैठे  हैं सदियों पुरानी खेतीबाड़ी
जमीन रसायनों की गुलाम हुई जाती है...
सब्जियां कीटनाशकों की....

गुलामी की शक्ल भर बदल गयी है...
भारी ऋण के तले दबे हैं
तथाकथित विकसित देश भी
कौन आजाद है यहाँ...?