नेता लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
नेता लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, जून 1

कितना झूठ हक़ीक़त कितनी

विजय माल कौन पहनेगा 


अबकी बार चार सौ पार 

चला यह नारा बारम्बार, 

लोकतंत्र के भवसागर से 

यही करेगा बेड़ा पार !


दुनिया देख रही भौंचक्की 

बना चुनाव एक त्योहार, 

नेताओं का बड़बोलापन 

शब्दों की दुधारी तलवार !


कितना झूठ हक़ीक़त कितनी 

चाहे परखना हर पत्रकार, 

किंतु अजब पहेली इसकी 

कोई न पाये पारावार !


दिवस-रात्रि एक कर डाले 

सोना-जगना भी दुश्वार,

अब जाकर आराम मिला है 

जब से पकड़ी थी रफ़्तार !


छुपा हुआ है इवीएम में 

राज बना चुनाव का रार, 

विजय माल कौन पहनेगा 

किसको मिली करारी हार !


शुक्रवार, दिसंबर 6

नेता और नाता

नेता और नाता



नेता का जनता से अटूट नाता है
पर कोई बिरला ही इसे निभाता है
जनता ने उसे चुना
अपनी आवाज बनाया
निश्चिन्त हो गयी
अपने स्वप्नों को उसे सौंप
पर नेता का नाता
टूट गया जनता से उसी वक्त
जब उसे राज सिंहासन दिखा
सत्ता पर विराजते ही
शोर प्रतीत होने लगी
 जनता की पुकार
स्वर भर लिए चाटुकारों के
अपने कानों में उसने
उड़ने लगा आकाश में
सुख-सुविधाओं का चश्मा लगाये आँखों पर
जनता, जो पहले उसके पीछे चलती थी
बुलेट प्रूफ शीशों के पीछे धकेल दी गयी  
किसी और नेता की प्रतीक्षा में
बैठी है फिर आँखें बिछाए जनता...




मंगलवार, फ़रवरी 28

कब आँखें उस ओर मुड़ेगीं


कब आँखें उस ओर मुड़ेगीं

पानी मथता है संसार
बाहर ढूँढ रहा है प्यार,
फूल ढूँढने निकला खुशबू
मानव ढूँढे जग में सार !

राजा भी यहाँ लगे भिखारी
नेता भी पीछे ही चलता,
सबने गाड़े अपने खेमे
बंदर बाँट का खेल है चलता !

सही गलत का भेद खो रहा
लक्ष्मण रेखा मिटी कभी की.
मूल्यों की कोई बात न करता
गहरी नींद न टूटे जग की !

जरा जाग कर देखे कोई  
कंकर जोड़े, हीरे त्यागे,
व्यर्थ दौड़ में बही ऊर्जा
पहुँचे कहीं न वर्षों भागे !

सत्य चहुँ ओर बिखरा है
आँखें मूंदे उससे रहता,
भिक्षु मन कभी तृप्त न होता
अहंकार किस बूते करता !

हर क्षण लेकिन भीतर कोई
बैठा ही है पलक बिछाये,
कब आँखें उस ओर मुड़ेगीं
जाने कब वह शुभ दिन आये !


रविवार, अगस्त 28

मैं भी अन्ना तू भी अन्ना



मैं भी अन्ना तू भी अन्ना


सोये हुए जन-जन में अन्ना
फूंक चेतना की चिंगारी,
आत्मशक्ति के बल पर तुमने
भारत की तस्वीर संवारी !

रोटी से न जीता मानव  
स्रोत ऊर्जा का है भीतर,
दिखा दिया संसार को सारे
इतने दिनों तक जल ही पीकर !

संसद में हुई चर्चा अविरत
भ्रष्टाचार मिटाना होगा,
भ्रमित न होगी अब जनता
 लोकपाल बिठाना होगा !

कोई तो हो ऐसा जिसको
पीड़ित जन फरियाद कर सकें,
रक्षक जो भक्षक बन बैठे
उनसे वे निजात पा सकें !

न्यायालय में न्याय कहाँ है
पैसे में बिकता कानून,
कॉलेजों में सीट नहीं हैं
निगल गये भारी डोनेशन !

राशन हो या गैस कनेक्शन
सब में गोलमाल चलता है,
ऊपर से नीचे तक देखें
भ्रष्टाचार यहाँ पलता है !

नेता भी बिकते देखे हैं
ऑफिसर बेचें ईमान,
घोटाले पर घोटाला है
नई पीढ़ी होती हैरान !

कोई ऐसा क्षेत्र बचा न
जहां स्वच्छ काम होता है,  
महँगाई तो बढती जाती
 सबका हाल-बेहाल होता है !

अन्ना ने मशाल जलाई
जाग गया है हिंदुस्तान,
झांक के अपने भीतर देखे
बने आदमी हर इंसान !

थोड़े से सुख सुविधा खातिर
गिरवी न रखेंगे आत्मा,
नई पीढ़ी यह सबक ले रही
अनशन पर बैठा महात्मा !

अन्ना का यह तप अनुपम है
देश का होगा नव निर्माण,
रोके न रुकेगा यह क्रम
करवट लेता हिंदुस्तान !