रविवार, अगस्त 28

मैं भी अन्ना तू भी अन्ना



मैं भी अन्ना तू भी अन्ना


सोये हुए जन-जन में अन्ना
फूंक चेतना की चिंगारी,
आत्मशक्ति के बल पर तुमने
भारत की तस्वीर संवारी !

रोटी से न जीता मानव  
स्रोत ऊर्जा का है भीतर,
दिखा दिया संसार को सारे
इतने दिनों तक जल ही पीकर !

संसद में हुई चर्चा अविरत
भ्रष्टाचार मिटाना होगा,
भ्रमित न होगी अब जनता
 लोकपाल बिठाना होगा !

कोई तो हो ऐसा जिसको
पीड़ित जन फरियाद कर सकें,
रक्षक जो भक्षक बन बैठे
उनसे वे निजात पा सकें !

न्यायालय में न्याय कहाँ है
पैसे में बिकता कानून,
कॉलेजों में सीट नहीं हैं
निगल गये भारी डोनेशन !

राशन हो या गैस कनेक्शन
सब में गोलमाल चलता है,
ऊपर से नीचे तक देखें
भ्रष्टाचार यहाँ पलता है !

नेता भी बिकते देखे हैं
ऑफिसर बेचें ईमान,
घोटाले पर घोटाला है
नई पीढ़ी होती हैरान !

कोई ऐसा क्षेत्र बचा न
जहां स्वच्छ काम होता है,  
महँगाई तो बढती जाती
 सबका हाल-बेहाल होता है !

अन्ना ने मशाल जलाई
जाग गया है हिंदुस्तान,
झांक के अपने भीतर देखे
बने आदमी हर इंसान !

थोड़े से सुख सुविधा खातिर
गिरवी न रखेंगे आत्मा,
नई पीढ़ी यह सबक ले रही
अनशन पर बैठा महात्मा !

अन्ना का यह तप अनुपम है
देश का होगा नव निर्माण,
रोके न रुकेगा यह क्रम
करवट लेता हिंदुस्तान !


6 टिप्‍पणियां:

  1. .हम अन्ना जी को शत-शत नमन करते है जिन्होंने हमें हमारे अन्दर छिपी शक्ति से परिचित कराया....

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  2. बहुत प्रेरक.अन्ना के लिए तुम्हारी लिखी कविता पढ़ने की इन्तजार थी,जो अन्ना के अन्नशन तोड़ने के साथ साथ पूरी हो गई.

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  3. समसामयिकी पर बेहतरीन पोस्ट.......अन्ना जी को नमन है हमारा.......ये राष्ट्र कभी उनकी इस गाथा को नहीं भुलायेगा |

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  4. अन्ना ने रास्ता दिखाया है उस पर चलना हमारा कर्तव्य है।

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