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सोमवार, मार्च 20

राहों को रोशन करे जिनकी ख़ुशबू

राहों को रोशन करे जिनकी ख़ुशबू 


जान-जान कर भी जाना नहीं जाता 

जो किसी परिभाषा में नहीं समाता, 

इक राज है जो आज तक खुल न पाया 

है ख़ुद में ख़ुदा पर नज़र कहाँ आता है !


अपना अहसास भी दिलाए जाता है 

फिर भी स्वयं को छिपाए जाता है, 

कभी यह तो कभी वह बनकर जगत में 

दिल को सदियों से लुभाए जाता है !


तू है तो हम हैं सदा इतना यक़ीन 

सहज कृपा के दिए दिल में जलते हैं, 

राहों को रोशन करे जिनकी ख़ुशबू 

हर कदम अकीदत के फूल खिलते हैं !