राहों को रोशन करे जिनकी ख़ुशबू
जान-जान कर भी जाना नहीं जाता
जो किसी परिभाषा में नहीं समाता,
इक राज है जो आज तक खुल न पाया
है ख़ुद में ख़ुदा पर नज़र कहाँ आता है !
अपना अहसास भी दिलाए जाता है
फिर भी स्वयं को छिपाए जाता है,
कभी यह तो कभी वह बनकर जगत में
दिल को सदियों से लुभाए जाता है !
तू है तो हम हैं सदा इतना यक़ीन
सहज कृपा के दिए दिल में जलते हैं,
राहों को रोशन करे जिनकी ख़ुशबू
हर कदम अकीदत के फूल खिलते हैं !
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