नदिया बहती जाये
यादों के कुछ कंकर
तलहट में सिमटे हैं,
हर पल वह नयी हुई
बतिया कहती जाये !
नदिया बहती जाये !
कल भी तो यह तट था
स्मृतियाँ पुरानी हुईं ,
इस पल में देखो हर
पर्यय सहती जाये !
नदिया बहती जाये !
अब क्यों वे घाव चुभें
पाहन के लहरों को,
घिस-घिस सुडौल होते
सैकत रहती जाये !
नदिया बहती जाये !
सुंदर
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