
मकर संक्रांति पर कुछ दोहे
मकर राशि में आदित्य का हो रहा प्रवेश
संक्रांति काल लिए आया यह पर्व विशेष !
उत्तर में खिचड़ी कहें पोंगल दखिन में है
लोहरि जो पंजाब में शुभ बिहु असम में है !
लकड़ी का इक ढेर हो शीत मिटाए आग
बैर कलुष जल खाक हों पर्व मनायें जाग !
मीठे गुड में तिल मिले नभ में उड़ी पतंग
लोहरि की इस आग ने दिल में भरी उमंग !
दाने भुने मकई के भर रेवड़ियाँ थाल
अंतर में उल्लास हो चमकें सबके भाल !
अनिता निहालानी
१३ जनवरी २०११
