रविवार, अप्रैल 3

नहीं खेल कोई क्रिकेट सरीखा

नहीं खेल कोई क्रिकेट सरीखा

सोने की किरणों की चादर
मानो थी भारत ने ओढ़ी,
शरमाने लगे सितारे भी
जगमग रोशनियाँ जब छोडीं !
  
एक नया इतिहास बनाया
सारी दुनिया को दिखलाया,
एक साथ दिल सबके धड़के
जोश भरे तन-मन जब थिरके !

क्रिकेट बना है धर्म अनोखा
नहीं खेल कोई क्रिकेट सरीखा,
धर्म, जाति, भाषा को छोड़ा
कोटि-कोटि जनों को जोड़ा !

एक ही आशा एक भावना
विश्व कप है हमको पाना,
धोनी ने की टीम तैयार
सचिन को देने इक उपहार !

गैरी क्रिस्टन बने द्रोण हैं
गिन-गिन सारे गुर सिखलाये,
श्रीलंका ने खेला डट के
पर भारत ने दांव दिखाए !

युवराज हो या गम्भीर
सबने छोड़े अपने तीर,
टिक न पाए प्रतिद्वंद्वी
विजय पताका लहरा दी !

उत्सव का माहौल बना है
सारा भारत साथ खड़ा है,
एक ही धुन है एक जोश है
दिलों में सबके संतोष है !

अनिता निहालानी
३ अप्रैल २०११

9 टिप्‍पणियां:

  1. उत्सव का माहौल बना है
    सारा भारत साथ खड़ा है,
    एक ही धुन है एक जोश है
    दिलों में सबके संतोष है ...

    बहुत सच कहा है...इस खेल ने सारे भारत को जोड़ दिया..खेल और दर्शकों की भावनाओं का बहुत उत्कृष्ट चित्रण..आभार

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  2. एक ही धुन है एक जोश है
    दिलों में सबके संतोष है !
    मज़ा आ गया दोस्त
    १ करोड़ लोगो की मुराद पूरी हुई

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  3. भारत वर्ल्ड कप विजयी हुआ है सचमुच यह एक बड़ी कामयाबी है. आपकी कविता सही रूप में जीत का संतोष बयां करती है.

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  4. क्रिकेट बना है धर्म अनोखा
    नहीं खेल कोई क्रिकेट सरीखा,
    धर्म, जाति, भाषा को छोड़ा
    कोटि-कोटि जनों को जोड़ा
    bahut sundar prastuti .world cup v nav samvatsar ki hardik shubhkamnayen

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  5. १ करोड़ नहीं १२१ करोड़ लोगों की मुराद पूरी हुई !

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  6. सुभानाल्लाह......मेरा सलाम आपको इस पोस्ट के लिए .....
    भारत आज विश्व विजेता है इसमें उसकी जनता का बहुत बड़ा हाथ है......

    अनीता जी आपसे एक अनुरोध है मेरे ब्लॉग कलम का सिपाही पर शारदा जी ने टिप्पणी के माध्यम से एक सवाल उठाया है, मैं चाहता हूँ की उसका जवाब आप दें क्योंकि मुझे लगता है आप मुझसे बेहतर जवाब दे पाएंगी.....मैं इंतज़ार करूँगा |

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  7. अनीता जी,

    मैं तहेदिल से शुक्रगुज़ार हूँ आपका जो आपने वक़्त निकला ......मैं तो आपका मुरीद हो गया ......सुभानाल्लाह ......कितने सटीक और कम शब्दों में आपने इतना अच्छा जवाब दिया है .........मुझे इतना कहने में शायद दो पन्ने सर्फ़ करने पद जाते :-) ..........एक बार फिर आपका शुक्रिया |

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  8. इस कविता के माध्यम से तो हम सबकी भावनाओं को भी शब्द मिल गए.जय क्रिकेट,जय भारत.

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  9. मनभावन अभिव्यक्ति ...बधाई

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