बुधवार, अप्रैल 27

बस यूँ ही पुकारा करते हैं






बस यूँ ही पुकारा करते हैं


जीने की तमन्ना दिल में है, जीने का सबब मालूम नहीं
जीने का सलीका सीखा नहीं, बस वक्त गुजारा करते हैं I

ऊपर ऊपर से सहला दें, दिल छू लें ऐसे बोल कहाँ
कभी हाथ बढा के रोका नहीं, बस यूँ ही पुकारा करते हैं I

कुदरत के पुजारी बनने का, दावा करते जो थकते नहीं
साथी बन गए लुटेरों के, क्या खूब नजारा करते हैं I

जो दीनो-धर्म की बातें करें, कण-कण में रब है समझाएं
परहेज उन्हें भी गैरों से, रब का बंटवारा करते हैं I

जन्मों तक साथ निभाने की, कसमें खाना तो सीख लिया
सुख था तो साथ गंवारा था, गर्दिश में किनारा करते हैं I

अनिता निहालानी
२७ अप्रैल २०११

12 टिप्‍पणियां:

  1. जन्मों तक साथ निभाने की, कसमें खाना तो सीख लिया
    सुख था तो साथ गंवारा था, गर्दिश में किनारा करते हैं I


    बहुत ही सुन्दर भावाव्यक्ति…………शानदार गज़ल्।

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  2. बहुत बढ़िया रचना है।

    जन्मों तक साथ निभाने की, कसमें खाना तो सीख लिया
    सुख था तो साथ गंवारा था, गर्दिश में किनारा करते हैं ।

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  3. इस कविता की हर पंक्ति दिल पर चोट करती है,आँखे खोलती है.असलियत से सामना कराती है.सजग रहने के लिये याद रखने लायक है.

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  4. सुभानाल्लाह......ग़ज़ल वो भी इस अंदाज़ की.......दाद कबूल करें.....हर शेर काबिले तारीफ है ......बहुत खूब|

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  5. कुदरत के पुजारी बनने का, दावा करते जो थकते नहीं
    साथी बन गए लुटेरों के, क्या खूब नजारा करते हैं I

    वाह!!!!

    सादर

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  6. जन्मों तक साथ निभाने की, कसमें खाना तो सीख लिया
    सुख था तो साथ गंवारा था, गर्दिश में किनारा करते हैं I
    ye to vastvikta hai anita ji jise aapne shabdon me bahut hi khoobsurati se dhal diya hai.badhai.

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  7. बहुत अच्छी बात कहदी ईश्वर का भी बंटवारा होता है यहां । सुख के सब साथी उस वक्त तो बातें ऐसी करेगे और गर्दिश में तलाशो तो मना कर देगे घर मे नहीं है।पहला शेर तो ला जवाब है क्यों जी रहे है पता नहीं क्यों मर गये पता नहीं , बहुत अच्छी रचना । माथुर साहव को धन्यवाद अच्छी रचना पढवाने के लिये।

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  8. जीने की तमन्ना दिल में है, जीने का सबब मालूम नहीं
    जीने का सलीका सीखा नहीं, बस वक्त गुजारा करते हैं I

    ...यही आज का सत्य है..बहुत लाज़वाब रचना..हरेक पंक्ति बेमिसाल.आभार

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  9. कुदरत के पुजारी बनने का, दावा करते जो थकते नहीं
    साथी बन गए लुटेरों के, क्या खूब नजारा करते हैं I
    ऐसे ही लोग हमारे इर्द गिर्द भरे पड़े हैं।

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  10. मनभावन अभिव्यक्ति ...बधाई

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