गुरुवार, जनवरी 5

घर का पता


घर का पता 


भूल गये हैं अपने घर का पता 
और पूछना भी नहीं चाहते
ऐसा नहीं कि शर्माते हैं 
कोई अपना घर भी है  
यह भी नहीं जानते 
 भटकते इधर-उधर
पड़ावों में रातें बिताते
 याद ही नहीं आती  घर की
खानाबदोश की तरह 
कंधों पर उठाये रहते हैं तम्बू 
और रातों को तारे गिनते
नींद में कुनमुनाते !






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