शुक्रवार, फ़रवरी 5

जाने कैसी लीला अद्भुत

जाने कैसी लीला अद्भुत 

 भोली सी मुस्कान ओढ़कर 
सेल्फी तो इक ले डाली,
पर दीवाने दिल से पूछा 
है क्या वह खुद से भी राजी !

जिसने देखे स्वप्न सलोने 
या जो ख्वाबों में रोया था, 
उस छलिया से कुछ तो पूछो 
कब वह चैन से सोया था !

‘उसको’ तो बस तकना आता 
टुकुर-टुकुर देखा करता है, 
मन बेचारा किसकी खातिर 
सुख-दुःख की लीला रचता है !

मन भोला जो लगन लगाता
जानबूझ कर अगन लगाता, 
उसकी याद में रोती मीरा 
राधा का दामन भर जाता !

जाने कैसी लीला अद्भुत 
देख-देख दुनिया हैरान,
युग-युग से जग में रहते हैं 
कभी  न उससे  हुई पहचान !

11 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (०५-०२-२०२१) को 'स्वागत करो नव बसंत को' (चर्चा अंक- ३९६९) पर भी होगी।

    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    अनीता सैनी

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  2. भोली सी मुस्कान ओढ़कर
    सेल्फी तो इक ले डाली,
    पर दीवाने दिल से पूछा
    है क्या वह अपने से राजी !

    बहुत खूब...
    सुंदर रचना...

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  3. बहुत ही सुंदर सृजन अनीता जी ,सादर नमन

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  4. ‘उसको’ तो बस तकना आता टुकुर-टुकुर देखा करता है,
    मन बेचारा किसकी खातिर सुख-दुःख की लीला रचता है !

    सुंदर रचना...

    जवाब देंहटाएं
  5. नमस्ते अनीता जी, मैं श्रीकृष्ण का च‍ित्र देखकर ही मैं समझ गई थी क‍ि आपकी रचना ही होगी यह ...
    मन भोला जो लगन लगाता
    जानबूझ कर अगन लगाता,
    उसकी याद में रोती मीरा
    राधा का दामन भर जाता !..वाह

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    1. स्वागत व आभार अलकनन्दा जी, आपके स्नेह से अभिभूत हूँ

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  6. बस उसी रब को ही तो पहचानना है ... जिसकी लीला से चल रहा है ये जग ...
    बहुत भावपूर्ण लाजवाब रचना ...

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