एक सनातन वृक्ष जगत है
क़ुदरत में ही सदा अवस्थित
सुख-दुख रूपी फल लगते हैं,
त्रिगुण रूपी मूल अति गहरी
एक सनातन वृक्ष जगत है !
पंच भूत, मन, बुद्धि, अहंता
सदा अष्ट शाखाओं वाला
सप्त धातुएँ छाल बनी हैं
एक सनातन वृक्ष जगत है !
नौ द्वारों के कोटर इसमें
दस प्राण बने पत्ते जिस पर
रस देता पुरुषार्थ रूप में
एक सनातन वृक्ष जगत है !
पंच इन्द्रियों से हम जानें
उत्पन्न होकर बढ़े व मिटे
दो पंछी रहते हैं जिस पर
एक सनातन वृक्ष जगत है !
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में गुरुवार 02 जुलाई, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंएक सनातन वृक्ष जगत है
जवाब देंहटाएंशानदार सोच की रचना
सुंदर
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