शुक्रवार, जून 15

प्रतिबिम्बित होता वह हममें


प्रतिबिम्बित होता वह हममें


गीत मिलन के गाओगे गर
विरह का दुःख भी कट जायेगा,
उजले दिन की राह तको तो
घोर तमस भी छंट जायेगा !

संदेहों को गले लगाते
दुःख वीणा भी वही बजाते,
उर आशा, विश्वासी अंतर
बाधा पथ की हर ले जाते !

उस प्रियतम की हम छाया हैं
इक-दूजे पर सदा आश्रित,
प्रतिबिम्बित होता वह हममें
हमसे जुड़ने को है बाधित !

जो भेजे संदेशा उस तक
 वही लौटकर भी पायेगा,
क्यों न पाती प्रीत की लिख दें
भीतर कलरव बस जायेगा !

अपने ही भावों में रच दी
उसने जीवन गाथा सबकी,
जो चाहें फिर चुन ले आयें
राग प्रलय का, धुन जीवन की ! 

11 टिप्‍पणियां:

  1. बहतरीन, आत्मविश्वास से परिपूर्ण
    मिलिए सुतनुका देवदासी और देवदीन रुपदक्ष से रामगढ में

    जहाँ रचा कालिदास ने महाकाव्य मेघदूत।

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  2. उजले दिन की राह तको तो
    घोर तमस भी छंट जायेगा !

    बहुत सकारात्मक ....
    सुंदर अभिव्यक्ति

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  3. अपने ही भावों में रच दी
    उसने जीवन गाथा सबकी,
    जो चाहें फिर चुन ले आयें
    राग प्रलय का, धुन जीवन की !

    ....बहुत सार्थक और सकारात्मक भाव...बहुत सुन्दर गहन प्रस्तुति...आभार

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  4. आपके ब्लॉग की चर्चा। यहाँ है, कृपया अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराएं

    शुभकामनाएं


    मिलिए सुतनुका देवदासी और देवदीन रुपदक्ष से रामगढ में

    जहाँ रचा गया महाकाव्य मेघदूत।

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  5. बहुत सार्थक और सकारात्मक भाव लिए गहन अभिव्यक्ति..

    उत्तर देंहटाएं
  6. जो भेजे संदेशा उस तक
    वही लौटकर भी पायेगा,
    क्यों न पाती प्रीत की लिख दें
    भीतर कलरव बस जायेगा !………………सार्थक संदेश देती सुन्दर रचना।

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  7. जीवन की धुन से सजा सुंदर गीत.

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  8. आप सभी सुधी पाठकों का आभार !

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  9. प्रियतम हो तो फिर घोर तामस ठहर ही नहीं सकता...बहुत ही सुन्दर भाव ..

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