रविवार, अगस्त 21

आप सभी को कृष्ण जन्माष्टमी पर ढेरों शुभकामनायें !



हे कृष्ण !

तू याद बहुत आता है, तू याद हमें आता है !

जब नभ पर बादल छाये हों, वन से लौट रही गाएँ हों
दूर कहीं वंशी बजती हो, पग में पायलिया बजती हो
मोर नाचते हों कुंजों में, खिले कदम्ब निकुंजों में
तू चितचोर हमारे उर को, कहीं चुराए ले जाता है

तू याद बहुत आता है, तू याद हमें आता है !

भादों की जब लगी झडी थी, अंधियारी अष्टमी रजनी को
लीलाधर तू आया जग में, करने पावन वसुंधरा को
कितनी हर्षित हुई देवकी, सफल तपस्या वसुदेव की
टूटे बंधन जब प्रकट हुआ, मिटा अँधेरा जग गाता है

तू याद बहुत आता है, तू याद हमें आता है !

यमुना की लहरें चढ़ आयीं, मथुरा छोड़ चले जब कान्हा
ले आश्रय योगमाया का, नन्दगाँव गोकुल निज माना
नन्द, यशोदा, दाऊ, दामा, सब बने साक्षी लीलाओं के
माखन चोरी, ऊखल बंधन, दुष्ट दमन प्रिय हर गाथा है

तू याद बहुत आता है, तू याद हमें आता है !

म्धुरातिमधुर वेणु वादन, ग्वाल-गोपियाँ मुग्ध हुईं सुन
नृत्य अनूठा त्रिभंगी मुद्रा, राधा संग मोहे वंशी धुन
चेतन जड़, जड़ चेतन होते, गोकुल, ब्रज, वृन्दावन पावन
युग बीते तेरी लीला से, नित नवीन रस जग पाता है
तू याद बहुत आता है, तू याद हमें आता है !

कान्हा तेरे नाम हजारों, मधुर भाव हर नाम जगाए
कानों में घोले मिश्री रस, माखन सा अंतर पिघलाए
तेरी बातें कहते सुनते, तेरी लीला गाते सुनते,
न जाने कब समय का पंछी, पंख लगाये उड़ जाता है

तू याद बहुत आता है, तू याद हमें आता है !











7 टिप्‍पणियां:

  1. वाह! आपकी पोस्ट पर आकर मन कृष्णमय हो गया है,
    सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई.
    कृष्ण जन्माष्टमी के शुभावसर पर आपको बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ.
    आपकी ज्ञान और भक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियाँ ब्लॉग जगत की थातीं हैं.

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  2. तू याद बहुत आता है, तू याद हमें आता है !

    भादों की जब लगी झडी थी, अंधियारी अष्टमी रजनी को
    लीलाधर तू आया जग में, करने पावन वसुंधरा को
    कितनी हर्षित हुई देवकी, सफल तपस्या वसुदेव की
    टूटे बंधन जब प्रकट हुआ, मिटा अँधेरा जग गाता
    बहुत सुन्दर आध्यात्मिक प्रस्तुति.श्री कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत बहुत शुभकामनायें

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  3. भादों की जब लगी झडी थी, अंधियारी अष्टमी रजनी को
    लीलाधर तू आया जग में, करने पावन वसुंधरा को ...

    वाह! अत्यंत सुन्दर रचना...
    जन्माष्टमी की सादर बधाईयाँ....

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  4. जब नभ पर बादल छाये हों, वन से लौट रही गाएँ हों
    दूर कहीं वंशी बजती हो, पग में पायलिया बजती हो
    मोर नाचते हों कुंजों में, खिले कदम्ब निकुंजों में
    तू चितचोर हमारे उर को, कहीं चुराए ले जाता है
    मन कृष्णमय हो गया है,....अत्यंत सुन्दर रचना...

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  5. कान्हा तेरे नाम हजारों, मधुर भाव हर नाम जगाए
    कानों में घोले मिश्री रस, माखन सा अंतर पिघलाए
    तेरी बातें कहते सुनते, तेरी लीला गाते सुनते,
    न जाने कब समय का पंछी, पंख लगाये उड़ जाता है

    तू याद बहुत आता है, तू याद हमें आता है !


    जन्माष्टमी के आने वाले पर्व पर आपकी यह सुन्दर पोस्ट
    स्मरण हो आई.जन्माष्टमी के पावन पर्व की अग्रिम शुभकामनाएँ.

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