शनिवार, सितंबर 24

चलो उगा दें चांद प्रीत का


चलो उगा दें चांद प्रीत का

चलो झटक दें हर उस दुःख को, जो तुमसे मिलने में बाधक
 चाहो तो तुम्हें अर्पण कर दें, बन जाएँ अर्जुन से साधक !

चलो उगा दें चाँद प्रीत का, तुमसे ही जो करे प्रतिस्पर्धा
चाहो तो अंजुरी भर-भर दें, भीतर उमग रही जो श्रद्धा !

चलो गिरा दें सभी आवरण, गोपी से हो जाएँ खाली
उर के भेद सब ही खोल दें, रास रचाएं संग वनमाली  !

फिर उपजेगा मौन अनोखा, जिससे कम की मांग व्यर्थ है
प्रश्न सभी खो जायेंगे तब, आत्म मिलन का यही अर्थ है !

क्रांति घटेगी उगेगा सूरज, भीतर सोया जब जागेगा,
परम खींचता हर पल सबको, आत्म क्षितिज तब रंग जायेगा !

14 टिप्‍पणियां:

  1. वाह अनीता जी गज़ब कर दिया …………जब इस अवस्था मे आ जायेगा तब ही स्वंय को पा जायेगा……………बेहद सशक्त और शानदार प्रस्तुति अन्तर्मन को छू गयी।

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  2. फिर उपजेगा मौन अनोखा, जिससे कम की मांग व्यर्थ है
    प्रश्न सभी खो जायेंगे तब, आत्म मिलन का यही अर्थ है !और
    इस अनोखे मौन को गूंगे के गुड़ की तरह बयान नही किया जा सकता.

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  3. चलो उगा दें चाँद प्रीत का

    सुन्दर प्रस्तुति पर बधाई ||

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  4. चलो उगा दें चाँद प्रीत का, तुमसे ही जो करे प्रतिस्पर्धा
    चाहो तो अंजुरी भर-भर दें, भीतर उमग रही जो श्रद्धा !

    बहुत सुन्दर ...

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  5. चलो गिरा दें सभी आवरण, गोपी से हो जाएँ खाली
    उर के भेद सब ही खोल दें, रास रचाएं संग वनमाली !

    बहुत ही गहन सारगर्भित अभिव्यक्ति...बहुत उत्कृष्ट प्रस्तुति..

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  6. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  7. चलो झटक दें हर उस दुःख को, जो तुमसे मिलने में बाधक
    चाहो तो तुम्हें अर्पण कर दें, बन जाएँ अर्जुन से साधक !अच्छी रचना....

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  8. क्रांति घटेगी उगेगा सूरज, भीतर सोया जब जागेगा,
    परम खींचता हर पल सबको, आत्म क्षितिज तब रंग जायेगा !

    बहुत ही उत्कृष्ट रचना और बहुत खूबसूरत भाव.

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  9. रांति घटेगी उगेगा सूरज, भीतर सोया जब जागेगा,
    परम खींचता हर पल सबको, आत्म क्षितिज तब रंग जायेगा

    बेहतरीन कविता।

    सादर

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  10. फिर उपजेगा मौन अनोखा, जिससे कम की मांग व्यर्थ है
    प्रश्न सभी खो जायेंगे तब, आत्म मिलन का यही अर्थ है !
    बहुत ही सुंदर भावाव्यक्ति क्या कहें वाह वाह ....

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  11. बहुत ही प्‍यारी कल्‍पना है। बधाई स्‍वीकारें अनीता जी, इस सुंदर कविता के लिए।

    शायद आपने ब्‍लॉग के लिए ज़रूरी चीजें अभी तक नहीं देखीं। यहाँ आपके काम की बहुत सारी चीजें हैं।

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  12. कोशिश तो यही जारी है अनीता जी पर शायद माया का बंधन मजबूत है आसानी से नहीं टूटता |

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