गुरुवार, जनवरी 23

जाग कर देखें तो सही

जाग कर देखें तो सही

क्या क्या चूकते जा रहे हैं
इस नींद के आकर्षण में...
नींद जो केवल रात्रि को ही नहीं दिन में भी
स्वप्न दिखाती है
झूठ-मूठ ही सुख का भ्रम देती
वास्तव में बहकाती है
जाग कर देखें तो सही
भोर हुई है अनोखी
पंछियों का कलरव नहीं सुना ?
आई फूलों की सुगंध लिए बयार
बनाएं उसे गले का हार
न कि बदलते रहें करवटें यूँ ही पड़े-पड़े
पुनः पुनः दोहराते रहें
बार-बार देखे स्वप्नों को
वही पुराने राग रोज गाते रहें
सांता आता है वर्ष में एक दिन
जीवन उपहार लिए चला आता है हर रोज
हर घड़ी, हर दिन को उत्सव बना लें
अपनी पुलक से, छुवन से प्रीत की
इर्द-गिर्द एक जन्नत बना लें
छोटी सी अपनी झोली में
भर सकते हैं जितना समेट लें
बरस रहा है विराट रात-दिन
जीवन का गीत गा लें समय रहते
कब होगी विदाई...कौन जाने ?


2 टिप्‍पणियां:

  1. नींद के बाद ........ हर सुबह एक नयी आशा एक नयी मुराद लेकर उगती है | बहुत ही सुन्दर |

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  2. कब होगी विदाई...ये याद रह जाये तो क्या कहना..

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