शनिवार, जुलाई 18

माँ

माँ 


दी शिक्षा, अक्षर ज्ञान दिया 
ममता का पाठ पढ़ाया भी, 
दुनियादारी के सूत्र दिए 
हाथों का हुनर सिखाया भी !

तारीफों का इक ताज दिया 
ना दोष कभी देखा कोई, 
सुख की बरसात सदा ही की 
माँ बच्चे के दुःख पर रोई !

हों अवगुण कई, मानवी है 
माँ की ममता निर्दोष सदा, 
जीवन में साथ निभाती है 
सँग जीवन के भी बाद सदा !

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