देखो पल में कहाँ खो गया
बड़ी-बड़ी
बातें करता था
पा
के रहेंगे दम भरता था
था
कितना दीवाना सा दिल
मुट्ठी
में रेत भरता था !
बात-बात
पर रूठा करता
घड़ी-घड़ी
जो टूटा करता
था
कितना अनजाना सा दिल
अपना
दामन आप धो गया !
अपना
कद ऊंचा करने की
ज्ञान
निधि भीतर भरने की
तिकडम
सदा लगाता जो दिल
स्वयं
ही तो शून्य हो गया !
इसे
बता दे उसे जता दे
इसे
सिखा दे उसे धता दे
इसी जोड़तोड़ में रहता
दिल
बेचारा धूल हो गया !
मिटकर
ही चैन पाया है
लौट
के अपने घर आया है
एक
बबूला ही तो था दिल
पल
भर में ही हवा हो गया !
कितने
ही दावे कर डाले
महल
हवा में ही गढ़ डाले
पानी
में दीवारें चुनता
अन्तरिक्ष
में कहीं खो गया !
