मंगलवार, दिसंबर 27

नई मंजिलें राह देखतीं


नई मंजिलें राह देखतीं

जाने कहाँ-कहाँ से आते, मन दिन-रात गुना करता है
कई विचारों के गालीचे, यह दिन-रात बुना करता है

सोये सोये जन्म बीत गए, जगे भाग्य जो था सोया
वही मिलेगा इस जीवन में, जो कुछ हमने है बोया

रंग भरें सुकल्पनाओं में, जीवन पथ सुंदर होगा
नित नया निखार आयेगा, हर पल तब बेहतर होगा

ऋतु आने पर बीज पनपते, भीतर कोई चेता देता
शुभ संकल्प बीज के सम ही, सही समय पर फल देता

नई मंजिलें राह देखतीं, रस्ते कुछ नए बुला रहे हैं
कर्म सदा हों सबके हित में, गीत यही तो सुना रहे हैं

13 टिप्‍पणियां:

  1. नई मंजिलें राह देखतीं, रस्ते कुछ नए बुला रहे हैं
    कर्म सदा हों सबके हित में, गीत यही तो सुना रहे हैं

    ...यही एक शास्वत सत्य है और यही आकांक्षा...आभार

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  2. नई मंजिलें राह देखतीं, रस्ते कुछ नए बुला रहे हैं
    कर्म सदा हों सबके हित में, गीत यही तो सुना रहे हैं..
    bahut sunder ...

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  3. यह रचना हमें नवचेतना प्रदान करती है और नकारात्मक सोच से दूर सकारात्मक सोच के क़रीब ले जाती है।

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  4. नई मंजिलें राह देखतीं, रस्ते कुछ नए बुला रहे हैं
    कर्म सदा हों सबके हित में, गीत यही तो सुना रहे हैं...sakaratmak soch ko darshati panktiya....

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  5. ऋतु आने पर बीज पनपते, भीतर कोई चेता देता
    शुभ संकल्प बीज के सम ही, सही समय पर फल देता
    satya

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  6. ऋतु आने पर बीज पनपते, भीतर कोई चेता देता
    शुभ संकल्प बीज के सम ही, सही समय पर फल देता

    हर चीज़ समय पर ही होती है ..सुन्दर रचना

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  7. कैलाश जी, अनुपमा जी, रश्मि जी, अनामिका जी, सुषमा जी, संगीताजी, व मनोज जी आप सभी को नए वर्ष की शुभकामनायें व आभार!

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  8. बहुत सुन्दर नए युग की नयी आशा |

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  9. सोये सोये जन्म बीत गए, जगे भाग्य जो था सोया
    वही मिलेगा इस जीवन में, जो कुछ हमने है बोया
    bahut khub..bahut achchi rachna
    welcome to my blog :)

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  10. नई मंजिलें राह देखतीं, रस्ते कुछ नए बुला रहे हैं
    कर्म सदा हों सबके हित में, गीत यही तो सुना रहे हैं.....काफी प्रेरणादायक कविता.....आप की लेखनी काफी कुछ लिखती है...बधाई हो आप को,आप के दो ब्लॉग देखे,दोनों ही पसंद आये और अपने से लगे

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  11. ऋतु आने पर बीज पनपते, भीतर कोई चेता देता
    शुभ संकल्प बीज के सम ही, सही समय पर फल देता...
    बहुत सार्थक सुन्दर रचना...
    सादर बधाई...

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  12. अब धैर्य कहाँ कि शुभ समय की प्रतीक्षा करे कोई ..फल के लिए..

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