सोमवार, अप्रैल 1

आसमां की मौन चादर


आसमां की मौन चादर



श्वेत कंचन खिलखिला कर
तितलियाँ कुछ मुस्कुरा कर
श्याम भंवरे गुनगुना कर
क्या सुनाते हैं ? सुनें हम !

पंछियों की चहचहाहट
पत्तियों की सरसराहट
पवन की सरगोशियाँ ये
क्या बताती हैं ? गुनें हम !

आसमां की मौन चादर
ध्या रही किसको निरंतर
नीलिमा की रश्मियाँ ये
क्यों सजाती है ? कहें हम !

दूब कोमल सिर उठाती
दबी फिर भी महमहाती
राह को सुंदर बनाती
क्यों सुहाती है ? जगें हम !

रंग सूरज ने उकेरे
गंध धरती की बिखेरें,
कुसुम अनगिन रूप वाले
खबर किसकी दें, भजें हम !

एक सुर गूंजे फिजां में
एक गुंजन कहकशां में,
एक मस्ती सी समां में
क्या लुटाती है, भरें हम !

12 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर रंग से सुरुचिपूर्ण सजी धरा ....
    और उतनी ही खूबसूरत आपकी अभिव्यक्ति ....
    मन का भंवर करे पुकार ....
    बहुत सुन्दर रचना ...अनीता जी .....!!

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  2. प्रकृति की सुन्दर छटा बिखेर दी है .अनीता जी.. बहुत सुन्दर रचना .. ..

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  3. श्वेत कंचन खिलखिला कर
    तितलियाँ कुछ मुस्कुरा कर
    श्याम भंवरे गुनगुना कर
    क्या सुनाते हैं ? सुनें हम !
    पूरी रचना में रूपवाद (फॉर्म )छाया हुआ है बहुत गेय और सुर ताल लिए है रचना .

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  4. रंग सूरज ने उकेरे
    गंध धरती की बिखेरें,
    कुसुम अनगिन रूप वाले
    खबर किसकी दें, भजें हम ! prakriti varnan ki uttam rachna
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  5. अद्भुत....

    एक जीवन आ रहा है...
    एक जीवन जा रहा है...
    समय ये क्या गा रहा है...
    मन लगा कर ये सुने हम....!!

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  6. मस्ती सी समां में कितना भी समेटो तो भी कम ही लगता है .

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  7. प्रकृति का कण-कण एक सुन्दर इशारा करता है ......बहुत बहुत सुन्दर कविता ।

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  8. अनुपमा जी, माहेश्वरी जी, वीरू भाई, अमृता जी, इमरान, रजनीश जी, पूनम जी, कालीपद जी, व रविकर जी अप्प सभी का स्वागत व् आभार!

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