गुरुवार, मई 15

एक सनातन वृक्ष जगत है

एक सनातन वृक्ष जगत है


प्रकृति में ही सदा अवस्थित
सुख-दुःख दो फल धारण करता,
त्रिगुण रूप की हैं जड़ें हैं गहरी
एक सनातन वृक्ष जगत है !

पंच भूत, मन, बुद्धि आदि
है अष्ट शाखाओं वाला
सप्त धातुएं छाल बनी हैं
एक सनातन वृक्ष जगत है !

नव द्वार के कोटर धरता
दस प्राण हैं पत्ते जिस पर
रस देता पुरुषार्थ रूप में
एक सनातन वृक्ष जगत है !

पंच इन्द्रियों से जाना जाता
उत्पन्न होकर बढ़ता, मिटता
दो पंछी रहते हैं जिस पर
एक सनातन वृक्ष जगत है !


6 टिप्‍पणियां:

  1. सरल , सुन्दर शब्दों में सनातन-वृक्ष को सुंदरता से बांच दिया.. अति सुन्दर..

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!

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  3. दार्शनिक प्रस्तुति

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  4. बेहद उम्दा रचना और बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@आप की जब थी जरुरत आपने धोखा दिया (नई ऑडियो रिकार्डिंग)

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  5. बहुत गहन और प्रभावी रचना...

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  6. अमृता जी, माहेश्वरी जी, ओंकार जी, प्रसन्न जी, कैलाश जी आप सभी का स्वागत व आभार !

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