नई मंजिलें राह देखतीं
जाने कहाँ-कहाँ से आते
मन दिन-रात गुना करता है,
कई विचारों के गालीचे
यह दिन-रात बुना करता है !
सोये-सोये जन्मों बीते ,
अब तो जगे भाग्य जो खोया,
वही मिलेगा इस जीवन में
जो कुछ कल हमने था बोया!
रंग भरें सुकल्पनाओं में,
जीवन का पथ सुंदर होगा
नित्य नया निखार आयेगा,
पहले से सुंदर कल होगा !
ऋतु आने पर बीज पनपते
भीतर कोई चेता देता,
शुभ संकल्प बीज के सम ही
सही समय पर ही फल देता!
नई मंजिलें राह देखतीं,
रस्ते कुछ नव बुला रहे हैं
कर्म सदा हों सबके हित में,
गीत यही तो सुना रहे हैं!






