सोमवार, जुलाई 25

बोले मियां लाल बुझक्कड़


बोले मियां लाल बुझक्कड़

अपना हाल बुरा है यारों अपना हाल बुरा
लूट लिया है जग वालों ने दिल का हाल बुरा !

छोटे थे तो घरवालों की खूब धुनाई खाई
विद्यालय में मास्टर जी ने लम्बी छड़ी दिखाई !

इश्क ने मारा भरी जवानी हुई बड़ी रुसवाई
बात बनी जब बनते-बनते घोड़ी थी अकड़ाई !

तब से हम हैं मुफ्त के सेवक धरी रही चतुराई
एक मधुर मुस्कान के हित सारी तनख्वाह लुटाई !

आधा जीवन बीत चुका दुनियादारी न आयी
कटते-कटते कट जायेगी बाकी भी अधियाई !

8 टिप्‍पणियां:

  1. कल 26/07/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. बहुत बढ़िया ... नया अंदाज़ लिखने का ..

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  3. हा...हा....हा....बहुत खूब.....बाकी भी कट ही जाएगी|

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  4. बहुत सुन्दर अंदाज... :)))
    सादर...

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