गुरुवार, जुलाई 14

बम विस्फोट

बम विस्फोट

हवा में उठता शोर, गंध, शोले और
चीथड़े लाशों के
दो पल में जिंदगी ने दम तोड़ा
कटे सर, कहीं धड़
बर्बरता ने सारी सीमाओं को छोड़ा

चीखें, कराहटें, आर्तनाद
विलाप, विनाश, विध्वंस
कहीं दूर नफरत ने जाल बिछाया
कहर बरसाया

शैतान कभी मरा ही नहीं
दानव आज भी जिन्दा हैं
जीवित हैं राक्षस
आतंकियों के रूप में  

की दानव ने ही हथियारों की खेती
बमों के बीज उगाए
कभी धर्म, जाति, कभी देश के नाम पर
मासूमों पर बरसाए

सहमे, सिमटे डरे हुए लोग
मौत के क्रूरतम चेहरे
को भौंचक खुली आँखों से
देखते सो गए  
लोग जो कभी गुनगुनाते थे.
हँसते, गाते थे
बमों की आवाज से बहरे हो गए !
  


12 टिप्‍पणियां:

  1. bahut achcha likha hai Anita ji.ye sab ghatnaayen dekh sun sun kar dil kshubdh ho uthta hai.maine bhi aaj isi ke upar apne man ki kadvaahat ko shagdon me dhala hai.mere blog par aapka swagat hai.

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  2. सटीक दृश्य दिखती रचना ..मार्मिक प्रस्तुति

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  3. आज फिर दहल गयी मुम्बई,
    आज हुआ फिर तीन धमाका.
    मर गए देखो इसमें कई दर्जन,
    कौन थे वे -अपराधी या दुर्जन?

    दहकती उनकी चिता सजाकर,
    कब तक भोजन पकाओगे?
    वहाँ उजाड़ गए कितने परिवार,
    तुम तो बैठ मालपुवा खाओगे.

    यह देश है क्या लावारिश?
    या है इसका कोई भी वारिश.
    जब लड़ने की ताकत बची नहीं,
    तलाशेगा देश अब अपना वारिश.

    यह धमाका, देश पर तमाचा है,
    यह उस बिरयानी की कीमत है -
    जिसे कसाब - अफजल जैसों को.
    वर्षों से तुम खिला रहे हो.........

    अपने देशवासियों को कबतक ..
    लों की ज्वाला में झुलसाओगे?
    यह तोहफा था जन्म दिन का,
    कब तक इसको फोड़वाओगे ?

    जब तक जियेगा फूटेगा,
    बन कहर देश पर टूटेगा.
    यदि करना हो बंद धमाका,
    बंद करो जीवन की फ़ाइल.

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  4. सटीक दृश्य दिखती रचना ..मार्मिक प्रस्तुति

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  5. सामायिक विषय पर मार्मिक चित्रण.....

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  6. सहमे, सिमटे डरे हुए लोग
    मौत के क्रूरतम चेहरे
    को भौंचक खुली आँखों से
    देखते सो गए
    लोग जो कभी गुनगुनाते थे.
    हँसते, गाते थे
    बमों की आवाज से बहरे हो गए
    sahi hai vastav me yahi ho raha hai.

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  7. शैतान कभी मरा ही नहीं
    दानव आज भी जिन्दा हैं
    जीवित हैं राक्षस
    आतंकियों के रूप में

    ...बहुत मार्मिक और सार्थक प्रस्तुति..

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  8. http://charchamanch.blogspot.com/
    शुक्रवार : चर्चा मंच - 576

    जानते क्या ? एक रचना है यहाँ पर |
    खोजिये, क्या आपका सम्बन्ध इससे ??

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  9. बहुत मार्मिक चित्रण । आखिर क्या हासिल होता है इन विस्फोटों से सिवाय इंसानियत की तिल-तिल होती मौत के सिवा ?

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  10. पता नहीं किस मिटटी से बने है ये नेता और ये आतंकवादी

    यहाँ भी पधारिये
    अब तो कुछ करना ही होगा

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