शुक्रवार, जनवरी 27

आज नमन करते हैं तुझको


आज नमन करते हैं तुझको


माँ कुछ ऐसे दिल में रहती
होने का भ्रम भी न देती,
दुनिया से हो जाये रवाना
मन से कभी न रुखसत होती !

जिसके द्वारा जग में आये
जिसके होने से निज होना,
जिसकी अंगुली थाम के सीखा
नन्हें पैरों पैरों चलना !

जिसने भाषा संस्कार दिये
वह धैर्य, प्यार की मूरत है,  
वात्सल्य का एक खजाना
हर बच्चे की जरूरत है !

जिसको बहुत सताया हमने
जिसको बहुत रुलाया हमने,
उसने बस मुस्कान बिखेरी
उसको कहाँ हंसाया हमने !

बच्चों को आशीषें देती
उनकी झोली भर-भर देती,
खुद तो भूखी रह सकती थी
घर भर को तृप्त कर देती !

माँ की छाया कितनी कोमल
उसका साया सदा साथ है,
स्मृति ही सम्बल भर देती
सिर पर उसका सदा हाथ है !

जन्मदिन तो याद नहीं है
उसने कभी मनाया कब था,
आज मनाते पुण्यतिथि हम
अंतिम वह क्षण आया जब था !

इतनी घुली-मिली थीं खुद में
जान नहीं पाए तुम क्या थीं,
बच्चों का बस भला चाहतीं
ख्वाहिश और तुम्हारी क्या थी !

माँ रब जैसा रखे कलेजा
तभी सभी कुछ सह जाती है,
रेशा-रेशा प्रेम पगा है
बिन बोले सब कह जाती है !

आज नमन करते हैं तुझको
तेरे बहाने हर इक माँ को,
मातृभूमि व मातृभाषा को
जग जननी जगदम्बा माँ को !
   
  


7 टिप्‍पणियां:

  1. खूबसूरत प्रस्तुति |
    मेरी बधाई स्वीकारें ||

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  2. *आज नमन करते हैं तुझको
    तेरे बहाने हर इक माँ को,
    मातृभूमि व मातृभाषा को
    जग जननी जगदम्बा माँ को !*
    मातृशक्ति को प्रणाम!
    बेहद सहज एवं प्रवाहमय कविता!

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  3. जन्मदिन तो याद नहीं है
    उसने कभी मनाया कब था,
    आज मनाते पुण्यतिथि हम
    अंतिम वह क्षण आया जब था !
    ...सुन्दर...
    माँ ऐसी ही होती है.

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  4. बहुत सुन्दर ... माँ के लिए जितना भी कहा जाये कम है

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  5. माँ ......तुझे सलाम........बहुत सुन्दर है कविता|

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  6. रविकर जी, अनुपमा जी, विद्या जी,संगीता जी, इमरान आप सभी का स्वागत व आभार!

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  7. माँ हमारी आखिरी साँस में भी जीवित रहती है..माँ को नमन..

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