शुक्रवार, जनवरी 13

लड़कियों की प्रार्थना


लड़कियों की प्रार्थना


अच्छा घर हो अच्छा वर हो
बड़ी नौकरी न कोई डर हो,
इतना तो सब माँगा करतीं
‘स्वयं’ कैसी हों नहीं सोचतीं !

बाहर सब हो कितना अच्छा
भीतर के बल पर ही टिकता,
भीतर को यदि नहीं संवारा
बाहर का भी शीघ्र बिखरता !

जो होना है वह हो जाये
सहज हुआ मन दीप जलाये,
फेरे, वेदी, मंगल वाणी
जीवन को आगे ले जाये !

लम्बा रस्ता, दूर है मंजिल
अपनी राह स्वयं गढनी है,
कैसा मधुर खेल चलता है
एक पहेली हल करनी है !

6 टिप्‍पणियां:

  1. खूब-सूरत प्रस्तुति |
    बहुत-बहुत बधाई ||

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  2. अनीता जी आपने बहुत अच्छे और सटीक विषय पर लिखा है..........बहुत ही अच्छी अहि कविता......हैट्स ऑफ इसके लिए|

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  3. अच्छा घर हो अच्छा वर हो
    बड़ी नौकरी न कोई डर हो,
    इतना तो सब माँगा करतीं
    ‘स्वयं’ कैसी हों नहीं सोचतीं !
    इस पर अब कोई नहीं सोचता ...अजीब सा माहौल है, अजीब सी चाह है

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  4. बाहर सब हो कितना अच्छा
    भीतर के बल पर ही टिकता,
    भीतर को यदि नहीं संवारा
    बाहर का भी शीघ्र बिखरता !

    ...बहुत सच कहा है...लेकिन आजकल ऐसा सोचता कौन है..आभार

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  5. बाहर सब हो कितना अच्छा
    भीतर के बल पर ही टिकता,
    भीतर को यदि नहीं संवारा
    बाहर का भी शीघ्र बिखरता !

    बहुत सुंदर शिक्षा दे दी कविता के माध्यम से. आभार.

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